Business Desk :- जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। 23 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के आखिरी दिन यह इश्यू कुल 21 गुना सब्सक्राइब हुआ। संस्थागत निवेशकों ने अपने कोटे से 67 गुना ज्यादा बोली लगाई, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 2.7 गुना सब्सक्राइब हुआ।
इस IPO के लिए आवेदन की संख्या 1 करोड़ पार कर गई, जिससे यह इस आंकड़े तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला IPO बन गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड वारी एनर्जीज के नाम था, जिसे करीब 97 लाख आवेदन मिले थे।
पहले दिन ही 3 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था IPO
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुला था और पहले ही दिन 3.02 गुना सब्सक्राइब हो गया। इश्यू में 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 59.68 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं। दूसरे दिन संस्थागत निवेशकों की भारी मांग के चलते सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 3.50 गुना के पार पहुंच गया। आखिरी दिन तक निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और कुल सब्सक्रिप्शन 21 गुना हो गया।
IPO में निवेश के लिए कितने रुपए चाहिए?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने IPO का प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपए प्रति शेयर तय किया था। रिटेल निवेशकों को एक लॉट में 12 शेयरों के लिए आवेदन करना था। अपर प्राइस बैंड के हिसाब से न्यूनतम आवेदन राशि 13,428 रुपए बनती है। निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते थे, जिसके लिए 1,87,992 रुपए लगाने होते।
GMP 23% पर, 1,377 रुपए पर लिस्टिंग का अनुमान
IPO के अनलिस्टेड शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 258 रुपए यानी करीब 23% बताया गया। अपर प्राइस बैंड 1,119 रुपए में 258 रुपए जोड़ने पर संभावित लिस्टिंग भाव 1,377 रुपए निकलता है। हालांकि, GMP अनौपचारिक बाजार का संकेत है। यह लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं देता और वास्तविक भाव इससे अलग हो सकता है।

एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाए 8,110 करोड़ रुपए
जियो प्लेटफॉर्म्स इस IPO के जरिए कुल 30,213 करोड़ रुपए जुटा रही है। इश्यू खुलने से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करके 8,110 करोड़ रुपए जुटाए थे। एंकर आवंटन के बाद आम निवेशकों और अन्य संस्थागत खरीदारों के लिए करीब 22,103 करोड़ रुपए का नेट इश्यू बचा था।
एंकर निवेशकों में म्यूचुअल फंड, विदेशी संस्थागत निवेशक और बीमा कंपनियां जैसे बड़े निवेशक शामिल हो सकते हैं। IPO खुलने से पहले इन निवेशकों को शेयर आवंटित किए जाते हैं। इसे कंपनी के इश्यू के लिए शुरुआती संस्थागत मांग का संकेत माना जाता है, हालांकि इससे लिस्टिंग में मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
IPO से जुटाई रकम का इस्तेमाल कहां होगा?
कंपनी के मुताबिक, IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल प्रमुख सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) के कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।
इश्यू के बाद प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% होने का अनुमान है। वहीं, पब्लिक शेयरहोल्डिंग 33.57% से बढ़कर 35.52% हो जाएगी। यानी IPO के बाद कंपनी में सार्वजनिक निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ेगी और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी कम होगी।
निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
IPO को मिला भारी सब्सक्रिप्शन निवेशकों की मजबूत मांग दिखाता है। लेकिन लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन, बाजार की स्थिति और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगा। GMP को संभावित संकेत के तौर पर ही देखना चाहिए, निश्चित रिटर्न के तौर पर नहीं।

