करवा चौथ का पर्व पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना से किया जाता है। हर क्षेत्र में करवा चौथ का व्रत रखने की रस्मों में थोड़ा अंतर होता है। कहीं व्रत की शुरुआत सास की दी हुई सरगी से होती है तो कहीं मायके से भेजे गए बायना को बहुत महत्व दिया जाता है। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में करवा चौथ की मूल भावना एक जैसी है, लेकिन पूजा की तैयारी पहनावे, खान-पान और महिलाओं के सामूहिक आयोजन में स्थानीय परंपराओं की छाप साफ दिखाई देती है। करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर गुरुवार को रखा जाएगा।
1.पंजाब और हरियाणा में सरगी
पंजाब और हरियाणा में करवा चौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी से होती है।कुछ परिवारों में सास अपनी बहू को फल, मिठाई, सूखे मेवे और पारंपरिक पकवानों से सजी थाली देती है। महिलाएं भोर में सरगी ग्रहण करके व्रत शुरू करती हैं। दिनभर वे पारंपरिक कपड़े और आभूषण पहनती हैं। शाम को सुहागिनें एक जगह बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती है और पूजा के दौरान थालियां बदलने या फेरों की रस्म निभाती हैं।
कई परिवारों में मायके से भेजे गए कपड़े मिठाई, मेवे और सुहाग सामग्री को भी पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते है। यह परंपरा रिश्तों में अपनापन और दोनों परिवारों के जुड़ाव को दर्शाती है।
2.राजस्थान में बायना
राजस्थान में करवा चौथ के अवसर पर बायना देने की परंपरा है। मायके से बेटी के ससुराल भेजे जाने वाले इस उपहार में कपड़े, मिठाई, फल और सुहाग सामग्री शामिल रहती है। कई स्थानों पर महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा करती हैं और करवे को सजाने के लिए मिट्टी, रंगोली या स्थानीय सजावटी शैली का उपयोग करती हैं।
राजस्थानी परिवारों में पर्व की तैयारी केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती। घर के आंगन में सजावट, मेहंदी और महिलाओं का सामूहिक मिलन करवा चौथ को सामाजिक उत्सव का रूप देता है।

3.उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करवा माता की पूजा
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करवा चौथ की शाम करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई घरों में मिट्टी के करवे से पूजा होती है और महिलाएं कथा सुनने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। कुछ क्षेत्रों में घर की दीवार या पूजा स्थल पर गौरी, चंद्रमा और सूर्य के प्रतीक बनाए जाते हैं।महिलाएं एक साथ सजकर कथा सुनती हैं करवा बदलती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। इस आयोजन में परंपरा के साथ सामूहिक मेल-मिलाप भी जुड़ गया है।
4.गुजरात और महानगरों में बढ़ी लोकप्रियता
करवा चौथ परंपरागत रूप से उत्तर भारत का प्रमुख पर्व रहा है लेकिन अब गुजरात और महाराष्ट्र के महानगरों में भी यह उत्सव तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यहां उत्तर भारतीय परिवार अपनी पारिवारिक रीति के अनुसार सरगी, कथा, पूजा और चंद्र अर्घ्य की रस्में निभाते हैं। कई जगह स्थानीय समाजों में सामूहिक आयोजन रखे जाते हैं, जिनमें गुजराती और उत्तर भारतीय परंपराओं का मेल दिखाई देता है।

