रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए हर जिले में दो से तीन ऐसी कृषि गतिविधियों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनसे स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर उत्पादन और बाजार मिल सके। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने रायपुर संभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में इस दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में कृषि और इससे जुड़े विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई। परदेशी ने कहा कि किसानों को केवल परंपरागत खेती तक सीमित रखने के बजाय बाजार की मांग के अनुसार अधिक मुनाफा देने वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने के साथ किसानों तक उनका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।

15 नवंबर से धान खरीदी, तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश

राज्य में 15 नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह अभियान भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर शुरू होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि खरीदी के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए कृषि, सहकारिता और मार्कफेड समेत संबंधित विभाग आपसी समन्वय से जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करें।

बैठक में खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण और वितरण की स्थिति पर भी चर्चा हुई। परदेशी ने इन व्यवस्थाओं की निगरानी और पारदर्शिता के लिए साथी पोर्टल का उपयोग सुनिश्चित करने को कहा।

धान की जगह दूसरी फसलों की खेती पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान

फसल विविधीकरण की धीमी प्रगति पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को दलहन, तिलहन और कोदो-कुटकी व रागी जैसी मिलेट्स फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि धान के बदले निर्धारित दूसरी फसलों की खेती करने पर किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। इस योजना का ज्यादा से ज्यादा किसानों तक प्रचार-प्रसार करने और उन्हें लाभ दिलाने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही फूलों, फलों, मखाना और ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए। परदेशी ने कहा कि फसल विविधीकरण का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी में सुधार करना और उनकी उपज के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराना भी होना चाहिए।

बलौदाबाजार में 700 एकड़ में ब्लैक राइस की खेती

किसानों को बाजार की मांग के अनुसार लाभकारी फसलों से जोड़ने के मामले में बलौदाबाजार जिले की पहल का भी जिक्र हुआ। बैठक में जिले के कलेक्टर ने बताया कि कसडोल विकासखंड में करीब 700 एकड़ में ब्लैक राइस की खेती कराई जा रही है। इसके विपणन के लिए जापान की एक कंपनी से समन्वय किया गया है। बैठक में इस चावल की 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री की जानकारी दी गई।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने इस पहल की सराहना करते हुए दूसरे जिलों को भी स्थानीय जलवायु, मिट्टी, उत्पादन क्षमता और बाजार की मांग के आधार पर ऐसी गतिविधियां शुरू करने को कहा। उनका जोर ऐसे कृषि मॉडल विकसित करने पर रहा, जिनसे किसानों को बेहतर कीमत और बिक्री के अवसर मिल सकें।

हर जिले में बनेंगे दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल

रायपुर संभाग के सभी जिलों के अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ मिलकर दो से तीन विशिष्ट कृषि गतिविधियां चुनने के निर्देश दिए गए। इनका चयन जिले की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

इन गतिविधियों को मॉडल के तौर पर विकसित करने का उद्देश्य हर जिले को कृषि के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाना और किसानों को नई तकनीकों, बेहतर उत्पादन तथा विपणन के अवसर उपलब्ध कराना है।

कृषि यंत्रों के इस्तेमाल के लिए किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

कृषि यंत्रीकरण सबमिशन की समीक्षा के दौरान परदेशी ने कहा कि शासन किसानों को आधुनिक खेती के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहा है, लेकिन बुआई और कटाई के समय हरियाणा, पंजाब समेत दूसरे राज्यों से आने वाली मशीनों का इस्तेमाल अधिक दिखाई देता है।

उन्होंने इस स्थिति पर ध्यान देने और सरकारी योजनाओं के तहत कृषि यंत्र लेने वाले किसानों को उनके संचालन, रखरखाव और सही इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। इससे उपलब्ध मशीनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी।

अमानक कीटनाशक बेचने वालों पर होगी कार्रवाई

निजी कृषि आदान विक्रय केंद्रों में अनियमितताओं की शिकायतों पर भी बैठक में चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि कुछ विक्रेताओं पर प्रतिष्ठित कंपनियों के बीज या कीटनाशक खरीदने वाले किसानों को जबरन दूसरे अमानक उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें मिल रही हैं।

उन्होंने इस तरह की फोर्स टैगिंग पर रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही बिना लाइसेंस कीटनाशक बेचने और अमानक उत्पादों का विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए।

चक्रवात से फसल नुकसान पर तत्काल सर्वे के निर्देश

बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात के संभावित प्रभावों को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया। कृषि उत्पादन आयुक्त ने निर्देश दिए कि प्रदेश में कहीं भी चक्रवात के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में तत्काल सर्वे कराया जाए। प्रभावित किसानों के प्रकरण तैयार कर शासन के नियमों और योजनाओं के तहत पात्रता के अनुसार राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए।

पीएम-आशा के तहत खरीदी और भुगतान पर जोर

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा के दौरान निर्धारित फसलों की खरीदी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक ठोस उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति देना है। बीज उत्पादन और भंडारण की स्थिति संतोषजनक होने की जानकारी भी दी गई। साथ ही किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे बीज निगम के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे कामों के बारे में बताया गया।

बैठक में उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग की योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने किसानों और पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।

योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी प्रदेश के अलग-अलग संभागों के अधिकारियों के साथ क्रमवार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों का उद्देश्य कृषि और संबंधित विभागों की योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना, क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं को दूर करना और किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर दिलाना है। इसी क्रम में रायपुर संभाग की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक अजय अग्रवाल, पशुधन विकास विभाग के संचालक चंद्रकांत वर्मा, मत्स्यपालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग, मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक महेंद्र सावन्नी, एपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक सहित रायपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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