गुजरात के भरूच शहर में स्थित ऐतिहासिक 700 साल पुरानी जामा मस्जिद को लेकर एक नया कानूनी और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मस्जिद प्रबंधन समिति को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के जस्टिस डी. एम. देसाई की पीठ ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है।
यह विवाद तब सामने आया जब जैन समुदाय के प्रतिनिधियों और याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि भरूच किले की चढ़ाई पर बनी यह प्राचीन मस्जिद वास्तव में ऐतिहासिक जैन स्थल ‘अश्वबोध तीर्थ शाकुणिक विहार’ है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मस्जिद परिसर और उसके तहखाने में 19वें जैन तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ जी की मूर्ति के साथ-साथ कई अन्य प्राचीन जैन देवी-देवताओं के अवशेष व प्रतिमाएं मौजूद हैं।
मामले में कानूनी पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने भी इस मुद्दे पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पवित्र स्थल ‘अश्वबोध तीर्थ’ है, जिस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। अब इस पवित्र जैन स्थल को उसके वास्तविक स्वरूप में वापस लाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है।
अदालत में दायर याचिका में मांग की गई है कि इस 700 साल पुरानी इमारत के वास्तविक ऐतिहासिक स्वरूप और संरचना की ASI के माध्यम से वैज्ञानिक जांच कराई जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने मांग रखी है कि जैन श्रद्धालुओं को इस परिसर के भीतर नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी जाए।
भरूच रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह इमारत ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों जैसे वाराणसी की ज्ञानवापी, मथुरा की शाही ईदगाह, धार की भोजशाला और संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब भरूच की जामा मस्जिद का मामला भी देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में अदालत के रुख और विभिन्न पक्षों के जवाब के बाद इस मामले के और तूल पकड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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