कुंदन कुमार, पटना। तिरहुत स्नातक सीट का चुनाव परिणाम सामने आ चुका है, यहां से शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर से जीत दर्ज की है। उन्होंने जेडीयू-आरजेडी और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को हराकर यह जीत हासिल की है। वंशीधर अपने लड़ाकू स्वभाव के लिए जाने जाते रहे हैं और शिक्षक हितों के लिए आवाज उठाते रहे हैं।
9,147 वोटो से हासिल की जीत
तिरहुत स्नातक के लिए हुए मतदान में निर्दलीय उम्मीदवार वंशीधर ब्रजवासी को कुल 31,832 वोट मिले। वहीं, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी जदयू के अभिषेक झा को 22,685 वोट मिले। इस तरह वंशीधर ब्रजवासी ने 9,147 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा। 9,147 वोटों से ब्रजवासी की बड़ी जीत पर उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। लोग एक-दूसरे को बधाई देकर और अबीर-गुलाल उड़ाकर वंशीधर ब्रजवासी के फिर से एमएलसी बनने का जश्न मना रहे हैं।
राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को चटाई धूल
बिहार के तिरहुत स्नातक चुनाव के रिजल्ट ने जेडीयू, आरजेडी से लेकर प्रशांत कुमार तक की नींद उड़ा दी है। इस चुनाव में प्रदेश स्तर पर एक ऐसा नेता खड़ा हो गया है, जो युवाओं की आवाज को विधान परिषद में उठाएगा। दरअसल यह वही वंशीधर बृजवासी हैं, जिन्होंने बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव रहे केके पाठक से ही पंगा लेकर सुर्खियों में आए थे और उन्होंने शिक्षामित्र से लेकर विधायकी तक का सफर तय किया।
केके पाठक ने कर दिया था सस्पेंड
तिरहुत चुनाव में वंशीधर ब्रजवासी ने राजनीतिक पंडितों को दुबारा चौंकाते हुए जेडीयू-आरजेडी और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया। शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी हमेशा शिक्षकों के हित में आवाज उठाते रहे हैं। केके पाठक से उनका टकराव जगजाहिर है। उनसे टकराने के बाद ब्रजवासी को सस्पेंड कर दिया गया था। सीतामढ़ी में जानकी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए स्थानीय स्तर पर मांग का ख्याल रख सदन में वंशीधर ब्रजवासी ने प्रमुखता से आवाज उठाई और जमीन चिन्हित करने या उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा एवं पत्राचार किया।
शिक्षकों और स्नातकों की उठाते रहे हैं आवाज
इसके बाद सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद ठाकुर ने हाल ही में कहा है कि जो लोग विश्वविद्यालय के लिए जमीन देना चाहते हैं, वे जिला पदाधिकारी को पत्र लिखें ताकि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके। इस चुनाव में जहां एनडीए की ओर से जेडीयू के अभिषेक झा मैदान में थे, वहीं महागठबंधन की ओर से आरजेडी के रश्मि विनायक गौतम और जनसुराज के विनायक मोहन चुनावी मैदान में थे।
इनके अलावा कई शिक्षक नेता, कारोबारी, इंजीनियर और राजनीतिक क्षेत्र के बागी भी चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन शिक्षक संघर्ष से अपनी पहचान बनाने वाले वंशीधर ब्रजवासी ने सबको पछाड़ते हुए तिरहुत चुनाव में दुबारा जीत दर्ज की। वो लगातार सड़कों पर शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाते रहे, जिसका नतीजा ये रहा कि आज उनको एमएलसी चुनाव में भारी जन समर्थन मिला।
ये भी पढ़ें- बिहार विधान परिषद में साथ बैठेंगे दो सगे भाई, एक कांग्रेस तो दूसरा RJD से बना MLC, पिता भी रह चुके हैं मंत्री

