हेमंत शर्मा, इंदौर। नगर निगम के चार साल पूरे होने के साथ ही शहर की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने भाजपा की महापौर परिषद पर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनहित की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस का दावा है कि पिछले चार वर्षों में नगर निगम विकास के लिए नहीं, बल्कि घोटालों और विवादों के लिए सुर्खियों में रहा। पार्टी का आरोप है कि एक के बाद एक कई गंभीर मामले सामने आए, लेकिन किसी भी प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने संयुक्त रूप से महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा कि जनता को विकास के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन जमीन पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं।

बेलेश्वर से भागीरथपुरा तक… कांग्रेस ने उठाए पुराने जख्म

कांग्रेस ने सबसे पहले बेलेश्वर धाम मंदिर हादसे का मुद्दा उठाया, जिसमें 36 लोगों की जान चली गई थी। पार्टी का आरोप है कि इस दर्दनाक हादसे के बाद कुछ अधिकारियों को निलंबित जरूर किया गया, लेकिन बाद में उन्हें चुपचाप बहाल कर दिया गया। कांग्रेस का यह भी दावा है कि पीड़ित परिवारों को आज तक न्याय और पर्याप्त सहायता नहीं मिल सकी।इसी तरह भागीरथपुरा में कथित रूप से दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला भी कांग्रेस ने उठाया। पार्टी का आरोप है कि इतने बड़े घटनाक्रम के बावजूद निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई।

1000 करोड़ के सीवर और नामांतरण घोटाले पर सवाल

कांग्रेस ने नगर निगम के कथित 1000 करोड़ रुपये के सीवर घोटाले और हाल ही में सामने आए नामांतरण घोटाले को भी मुद्दा बनाया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इन मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की गई। पार्टी का दावा है कि नगर निगम भ्रष्टाचार के मामलों में जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने से बच रहा है।

600 करोड़ का बकाया… फिर भी आर्थिक संकट

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पार्टी के अनुसार, राज्य सरकार से निगम को 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलनी बाकी है, लेकिन इस मुद्दे पर महापौर परिषद कोई ठोस पहल करती नजर नहीं आ रही। कांग्रेस का कहना है कि आर्थिक तंगी का असर अब शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी दिखाई देने लगा है।

परंपराएं खत्म करने का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने पिछले दो दशकों से विद्यार्थियों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को मिलने वाली सिटी बस पास की रियायतें बंद कर दी हैं। इसके अलावा, अनंत चतुर्दशी की झांकियों के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी इस वर्ष बंद करने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस ने इसे शहर की सांस्कृतिक परंपराओं और जनहित की योजनाओं की अनदेखी बताया।

सड़कें टूटी, पानी गंदा और जनता परेशान

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि शहर की अधिकांश सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। पैचवर्क के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल रहा। गर्मी के दौरान जल संकट, कई क्षेत्रों में गंदे पानी की शिकायतें और नगर निगम में बिना रिश्वत के काम नहीं होने जैसे आरोप भी कांग्रेस ने लगाए।

महापौर का मुखौटा पहनकर किया प्रदर्शन

इन मुद्दों को लेकर शहर कांग्रेस ने बड़ा विरोध प्रदर्शन भी किया। कार्यवाहक शहर कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल धाकरे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने छोटी ग्वालटोली, रेलवे स्टेशन, छत्रीबाग, बर्फानी धाम और यशवंत रोड तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महापौर का मुखौटा पहनकर विरोध जताया। हाथों में पोस्टर लेकर उन्होंने टूटी सड़कों और खुले चैंबरों के पास प्रदर्शन किया और नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सन्नी राजपाल, निर्मल मलोरिया, दीपक मलोरिया सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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