दिवाली से पहले बाजारों में खरीदारी की रौनक बढ़ने लगती है। धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा है, लेकिन इस बार 1 नवंबर को भी खरीदारी के लिए विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है । रविवार को पुष्य नक्षत्र होने से रवि पुष्य योग बनेगा। इसके साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा। ज्योतिषीय में पुष्य नक्षत्र को शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए महत्वपूर्ण कहा जाता है। इसीलिए इस दिन को त्योहार की तैयारियां पूरी करने के लिए खास अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का समय
रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग 1 नवंबर, रविवार को रहेगा। पंचांग के अनुसार, पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर की सुबह से शुरू होकर 2 नवंबर की सुबह तक रहेगा।
रवि पुष्य योग: 1 नवंबर को सूर्योदय के बाद से 2 नवंबर सुबह लगभग 4:30 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग: 1 नवंबर सुबह लगभग 6:33 बजे से 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: लगभग सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक।
यह दिन सोना-चांदी खरीदने के लिए क्यों खास है
पुष्य नक्षत्र को परंपरागत रूप से समृद्धि और स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। रविवार को इसके पड़ने से बनने वाला रवि पुष्य योग खरीदारी के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं और पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तन खरीदे जा सकते हैं। दिवाली की पूजा के लिए नई वस्तुएं खरीदने की योजना भी इसी दिन पूरी की जा सकती है। हालांकि, सोना-चांदी खरीदते समय शुभ मुहूर्त के साथ बजट, शुद्धता, हॉलमार्क और मौजूदा कीमतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
वाहन, मकान और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी
रवि पुष्य योग में नया वाहन खरीदना, उसकी बुकिंग कराना या डिलीवरी लेना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा जमीन, मकान और फ्लैट से जुड़े सौदे करने की परंपरा है। टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, रसोई के उपकरण और पीतल-तांबे के बर्तन खरीदने के लिए भी लोग इस अवसर को चुन सकते हैं।

नया कारोबार शुरू करने वालों के लिए अवसर
दुकान का उद्घाटन, नई फर्म की शुरुआत, व्यापारिक समझौते और काम-काज से जुड़ी नई योजनाएं शुरू करने के लिए भी इस दिन को शुभ है। व्यापारी दिवाली से पहले नई बहीखाते की किताबें, कलम और पूजा सामग्री खरीद सकते हैं। हालांकि, जमीन-जायदाद के कानूनी दस्तावेजों और बड़े निवेश से जुड़े फैसलों में पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है।
सूर्यदेव की पूजा और दान का महत्व
रविवार को सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित किया जा सकता है। पूजा के बाद जरूरतमंदों को अनाज, पीले कपड़े या अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। इस तरह रवि पुष्य के अवसर पर लोग खरीदारी के साथ पूजा-पाठ और सेवा के कार्य भी कर सकते है।

