Dharn Desk – श्राद्ध पक्ष को केवल पूर्वजों को याद करने का समय नहीं, बल्कि यह समय पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए भी खास माना जाता है। मान्यता है कि इस समय महादेव और उनके गणों की साधना करने से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं। यदि कोई मनुष्य लंबे समय से अपनी किसी विशेष मनोकामना के पूरा न होने से चिंतित है।तो श्राद्ध पक्ष के दौरान किया गया एक सरल कार्य उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

भगवान शंकर के साथ उनके परम भक्त और वाहन नंदी का स्मरण पूजन में विशेष फलदायक मानते है। नंदी को शिवजी का संदेशवाहक माना जाता है।जो भक्तों की प्रार्थना को सीधे भोलेनाथ तक पहुचाते हैं। श्राद्ध पक्ष के इन दिनों में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर पूजन करने से अटके हुए कार्य पूर्ण होने लगते हैं। श्राद्ध पक्ष के दौरान यह सरल विधि अपनाई जा सकती है।

नंदीकेश्वर पूजन में धतूरा अर्पित करने की विधि

सबसे पहले एक साफ और साबुत धतूरा प्राप्त कर लें।धतूरा कहीं से खराब या कटा-फटा न हो।धतूरा अर्पित करने से पूर्व मन में नंदी देव का ध्यान करें। नंदीकेश्वर से विनम्रतापूर्वक कहें
हे नंदी देव, आपकी आज्ञा लेकर मैं भगवान शंकर को धतूरा अर्पित करने जा रहा हूं, मेरी मनोकामना भोलेनाथ तक पहुचाएं…

इसके बाद शंकर मंदिर जाए और नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर वह धतूरा शिवलिंग पर श्रद्धा के साथ समर्पित कर दें।

इस प्रक्रिया के दौरान मन शांत रखें और शंकर जी का ध्यान बनाए रखें। नंदी की आज्ञा लेकर चढ़ाया गया धतूरा मनोकामना पूर्ति का मार्ग खोलता है।

श्राद्ध पक्ष में जब नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर धतूरा अर्पित किया जाता है तो भगवान शंकर बहुत खुश होते हैं। नंदी के माध्यम से की गई यह प्रार्थना निष्फल नहीं जाती और साधक की अटकी हुई मनोकामनाएं भी शीघ्र पूरी होने लगती हैं।