Dharm Desk :- हिंदू धर्म में भगवान शंकर के रौद्र और अति दयालु अवतार माने जाने वाले भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी का पर्व सबसे उत्तम माना गया है। फ्यूचर पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 3 अक्टूबर, सुबह 8 बजे से हो गई है। वहीं इस तिथि की समाप्ति 04 अक्टूबर, सुबह 5.52 मिनट पर हो रही है। वहीं कालाष्टमी की पूजा शाम को करने का विधान है।
भगवान शंकर ने इस सृष्टि में धर्म की मर्यादा और समय का संतुलन बनाए रखने के लिए काल भैरव का उग्र रूप धारण किया था। इसलिए कालाष्टमी के दिन की जाने वाली पूजा सीधे भगवान शंकर की ही महापूजा मानी जाती है।हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ने वाला यह पावन दिन साधकों को भय नकारात्मकता और जीवन की तमाम मानसिक और आर्थिक परेशानियों से उबारने की अद्भुत शक्ति रखता है।जो लोग लंबे समय से मानसिक तनाव अकारण डर, शत्रु बाधा या जीवन में लगातार आ रही चुनौतियों से परेशान हैं। उनके लिए यह दिन आत्मबल बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर होता है। जब कोई भक्तिभाव से काल भैरव का ध्यान करता है तो उसके अंदर की नकारात्मकता समाप्त हो जाती है और उसे कठिन परिस्थितियों से मुस्कुराकर लड़ने की शक्ति मिलती है।क्योंकि काल भैरव अपने भक्तों के लिए नगर और घर-परिवार के रक्षक क्षेत्रपाल के रूप में भी खड़े रहते हैं।

काल भैरव पूजा की सही विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें साफ वस्त्र पहनें और भगवान शंकर तथा काल भैरव का ध्यान कर दिनभर के लिए सात्विक व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर में या पास के शिव/भैरव मंदिर में जाकर एक देसी घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- इसके बाद प्रभु को फूल, अक्षत, फल और अपनी श्रद्धा अनुसार सात्विक प्रसाद अर्पित करें।
- पूजा के समय इस मंत्र का 108 बार जप करे जिससे मन शांत और ऊर्जावान होता है।
ओम कालभैरवाय नमः - काले कुत्ते की सेवा: काले कुत्ते को भगवान काल भैरव की सवारी माना गया है। इसलिए इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी, सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी या अन्य भोजन कराना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
- व्रत के दौरान फल या सात्विक आहार लें। पूरे दिन अपने आचरण में शुद्धता रखें किसी के प्रति मन में कटुता न लाएं और यदि स्वास्थ्य ठीक न हो तो कठोर उपवास के स्थान पर सामान्य सात्विक आहार ग्रहण करें।

