Dharm Desk :- पितृ पक्ष की शिवरात्रि पितृ दोष से मुक्ति और जन्म-मरण के चक्र से छूटने के लिए खास मानी जाती है। पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण का समय है। इस समय काल में भगवान शंकर की पूजा का भी अपना विशेष महत्व होता है। खासकर शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और घर-परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पंचांग के अनुसार, मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर को रात में 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होगी और यह 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 35 मिनट तक मान्य रहेगी। निशिता मुहूर्त के आधार पर मासिक शिवरात्रि का व्रत 8 अक्टूबर गुरुवार को रखना सही रहेगा। भोलेनाथ की पूजा में बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। महादेव को तो सच्ची श्रद्धा से चढ़ाया गया, एक फूल भी प्रिय है। यही कारण है कि शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर सफेद फूल चढ़ाने भर से बिगड़े काम बन जाते हैं।

1.शिवलिंग पर सफेद फूल चढ़ाने की विधि और महत्व

पितृपक्ष की शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर की पूजा करें। सबसे पहले शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके बाद साफ और ताजा सफेद फूल भोलेनाथ को चढ़ाएं।
फूल चढ़ाते समय कुछ पल आंखें बंद करके भगवान शंकर का ध्यान करें और अपने मन की इच्छा उनके सामने रखें। पूजा के दौरान मन शांत रखें और भोलेनाथ से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

2.सफेद फूल को क्यों माना जाता है खास?

सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सात्विकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए भोलेनाथ की पूजा में सफेद फूल चढ़ाना शुभ होता है। खासकर जब पूजा किसी मनोकामना के साथ की जा रही हो तो श्रद्धालु सफेद फूल चढ़ाकर भोलेनाथ से अपनी इच्छा पूरी करने की प्रार्थना करते हैं।

3.पूजा में सबसे जरूरी है

शिवरात्रि की पूजा में सामग्री से ज्यादा महत्व भक्त के भाव का माना जाता है। इसलिए फूल चढ़ाते समय मन में विश्वास रखें और भगवान शंकर का स्मरण करें।सच्चे मन से की गई भोलेनाथ की आराधना भक्त के जीवन में शांति और सकारात्मकता लाने वाली मानी जाती है।