अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक रैली में रूस से जुड़ी जांच की रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर जीतने वाले पत्रकारों की आलोचना की। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उन्हें लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए था। वहीं एक बार फिर उन्होंने दुनियाभर में कई युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते हुए नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई। बता दें कि, ट्रम्प अब तक 19 किताबें लिख चुके हैं।
ट्रम्प ने आरोप लगाया कि पत्रकारों ने इस मामले में गलत रिपोर्टिंग की थी और उन्हें इसके लिए पुरस्कार नहीं मिलना चाहिए था। इनमें 1987 में आई द आर्ट ऑफ द डील सबसे चर्चित है। जानकारी हो कि, पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। हालांकि यह किताबों, नाटक और संगीत के लिए भी दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर ट्रम्प का उड़ा मजाक
पुलित्जर पुरस्कार के लिए ट्रम्प के दावे पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उनका मजाक उड़ाया। कुछ लोगों ने उनके लेखन की क्षमता पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “जो व्यक्ति बच्चों की किताब तक नहीं लिख सकता, उसे लगता है कि उसे पुलित्जर मिलना चाहिए?”
एक अन्य यूजर ने ट्रम्प के बोलने के तरीके पर तंज कसते हुए लिखा, “ट्रम्प लेखन के लिए पुलित्जर चाहते हैं? वे अंग्रेजी भाषा के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं, जैसे उसे बंधक बना लिया हो। उनके वाक्यों को समझने के लिए तो खोजी दल की जरूरत पड़ेगी।”
2026 के पुलित्जर में ट्रम्प प्रशासन की रिपोर्टिंग भी शामिल
2026 में आधिकारिक सूची के मुताबिक, पुलित्जर पुरस्कार कुल 25 पुरस्कारों के रूप में दिए गए थे। इनमें पत्रकारिता, किताबों, नाटक, संगीत और एक विशेष सम्मान की श्रेणियां शामिल थीं। इन पुरस्कारों में ट्रम्प सरकार की नीतियों और उसके कामकाज पर की गई रिपोर्टिंग को भी सम्मान मिला।
रूसी मामले पर 2018 में 2 अखबारों को मिला था पुलित्जर
ट्रम्प ने रैली में रूस से जुड़े मामले पर अवार्ड पाने का जिक्र किया यह 2018 का मामला है। 2018 में द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट को रूस से जुड़ी खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला था। इन अखबारों ने अपनी खबरों में बताया था कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने दखल दिया था और उसकी जांच में ट्रम्प की चुनावी टीम के संबंधों की पड़ताल की गई थी।
ट्रम्प इन खबरों को गलत बताते हैं। उन्होंने पुरस्कार वापस लेने की मांग भी की थी। लेकिन 2022 में पुलित्जर बोर्ड ने जांच के बाद उनकी मांग खारिज कर दी। बोर्ड ने कहा कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे साबित हो कि पुरस्कार जीतने वाली खबरें बाद में गलत साबित हुई थीं।
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