अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद स्थित सरसपुर में महानगरपालिका द्वारा संचालित 66 साल पुरानी शारदाबेन अस्पताल की इमारत बेहद जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। भवन की कमजोर संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इसके कुछ हिस्सों को खाली करा दिया है। इस फैसले का सीधा असर अस्पताल की दैनिक चिकित्सा सेवाओं और मरीजों के उपचार पर पड़ा है।
अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हेतल वोरा ने बताया कि सुरक्षा कारणों से पुरानी इमारत के हिस्सों को खाली कराने के बाद अस्पताल में बेड की कुल क्षमता 400 से घटकर 300 रह गई है। इसके अलावा, रोजाना आने वाले मरीजों की ओपीडी (OPD) संख्या भी करीब 2500 से घटकर औसतन 2000 पर आ गई है। मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुराने इमरजेंसी कक्ष को बंद कर दिया गया है और आपातकालीन सेवाओं को नई इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया है।
इतना ही नहीं, इसी सप्ताह ऑपरेशन थिएटर (OT) को भी नई व्यवस्था में शिफ्ट किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव की वजह से दैनिक ऑपरेशनों की संख्या घटकर आधी रह गई है।
अस्पताल में बेड और सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर एवं जरूरतमंद मरीजों को शहर के अन्य प्रमुख अस्पतालों—जैसे मनपा संचालित एलजी अस्पताल (मणिनगर), जीसीएस अस्पताल (नरोडा रोड) और असारवा सिविल अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
दूसरी ओर, एलजी अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लीना डाबी ने बताया कि उनके अस्पताल में मरीजों की आवाजाही बढ़ी है। अगस्त और सितंबर के दौरान मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के साथ-साथ शारदाबेन अस्पताल से आ रहे मरीजों की वजह से भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव देखा जा रहा है।
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