Dharm Desk : अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए किया जाता है। इस दिन माताएं पूरे श्रद्धाभाव से अहोई माता की पूजा करती हैं। कार्तिक मास में आने वाली इस अष्टमी पर भगवान शंकर और पार्वती जी की आराधना का भी बहुत खास महत्व होता है। इस अवसर पर बेलपत्र और शमी पत्र से जुड़ा एक खास उपाय किया जाता है। इसमें एक बेलपत्र और तीन शमी पत्र लेकर माता अशोक सुंदरी के स्थान पर स्पर्श कराने के बाद भगवान शंकर के शिवलिंग पर अर्पित करना होता है।

इस उपाय से जुड़ी हैं सुख-समृद्धि की कामनाएं

बेलपत्र और शमी पत्र से किया जाने वाला यह पूजन शिव आराधना का विशेष तरीका है। अहोई अष्टमी पर इस विधि से पूजा करने के साथ माताएं अपनी संतान के जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने और उसकी तरक्की के लिए प्रार्थना करें। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ माता अशोक सुंदरी का स्मरण भी करें। पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ की गई पूजा मन को शांति देती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति, संतान की उन्नति और खुशहाली की कामना को विशेष स्थान मिलता है।

अहोई अष्टमी पर शिव परिवार की पूजा का महत्व

अहोई अष्टमी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है। इस दिन सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। अहोई माता की पूजा के साथ भगवान शंकर और माता पार्वती का स्मरण किया जाता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा पुरानी है। वहीं शमी पत्र भी महादेव की पूजा में विशेष स्थान रखता है। इन दोनों पत्तों को एक साथ अर्पित करके संतान के अच्छे स्वास्थ्य, उन्नति और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की जाती है।

बेलपत्र और शमी पत्र का उपाय

अहोई अष्टमी के दिन यह उपाय करने के लिए ज्यादा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए एक बेलपत्र और तीन शमी पत्र की जरूरत होती हैं।

1.सबसे पहले एक साफ और साबुत बेलपत्र के साथ तीन शमी पत्र लें। ध्यान रखें कि पत्तियां अच्छी स्थिति में हों।

2.अब इन सभी पत्तों को भगवान शंकर के मंदिर में ले जाएं। वहां शिवलिंग के पास स्थित माता पार्वती और शंकर जी की पुत्री माता अशोक सुंदरी के स्थान पर पत्तों को श्रद्धापूर्वक स्पर्श कराएं।

3.इसके बाद एक बेलपत्र और तीनों शमी पत्र भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढ़ा दें।

4.इन पत्तों को अर्पित करते समय शिवजी का ध्यान करें और अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना करें।