उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखकर उनके बयानों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मछली खाने और माफिया के सामने डरने के आरोपों पर प्रमाण मांगते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखकर उनके धार्मिक और जातिगत बयानों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे उग्र बयानों से प्रदेश का माहौल बिगड़ रहा है और मुख्यमंत्री होने के नाते उनके शब्दों की जिम्मेदारी भी बड़ी है.
अजय राय ने कहा कि जनता ने योगी आदित्यनाथ को लगातार दूसरी बार प्रदेश की समस्याओं के समाधान के लिए सत्ता सौंपी है, न कि राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत आरोप लगाने के लिए. उन्होंने अपने खिलाफ मछली की दावत और माफिया के सामने डरने के आरोपों को लेकर भी जवाब दिया.
मछली खाने के आरोप पर सवाल
अजय राय ने कहा कि वह शाकाहारी हैं और जिस कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया गया, वह निषाद समाज के निमंत्रण पर आयोजित हुआ था. कार्यक्रम के बाद आयोजकों ने अपने समाज के लिए भोज किया और उसमें क्या खाना है, यह तय करना उनका संवैधानिक अधिकार था.
उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी थी कि अगर उनके पास उनके मछली खाने की कोई सत्य प्रमाणित तस्वीर या वीडियो है तो उसे जनता के सामने लाएं, वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे. अजय राय के मुताबिक, चुनौती दिए पांच दिन बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया.
माफिया आरोप पर सफाई
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस ऐसी राजनीति नहीं करती और उसके नेताओं ने देश की आजादी तथा एकता के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दी है. उन्होंने कहा कि उनके भाई स्व. अवधेश राय की हत्या के बाद उन्होंने किसी माफिया के सामने सिर नहीं झुकाया और करीब 32 वर्षों तक न्याय के लिए अदालतों में लड़ाई लड़ी.
उन्होंने बताया कि इस दौरान उनकी सुरक्षा दो बार वापस ली गई. अप्रैल 2021 और सितंबर 2025 में सुरक्षा हटाई गई, लेकिन न तो सुरक्षा हटने से वह डरे और न ही न्याय की लड़ाई से पीछे हटे.
अजय राय ने कहा कि उनके बारे में माफिया के सामने डरने का आरोप केवल झूठ नहीं, बल्कि न्याय के लिए चली लंबी लड़ाई का भी अपमान है. उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि वह लगातार इतने उग्र और व्यक्तिगत बयान किस आधार पर देते रहे हैं.
सरकार की नीतियों पर सवाल
अजय राय ने पत्र में मुख्यमंत्री को उनके वर्ष 2007 के लोकसभा कार्यकाल की भी याद दिलाई. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकसभा में अपनी सुरक्षा के सवाल पर भावुक हुए थे और सरकार से न्याय की मांग की थी.
उन्होंने सवाल किया कि आज सत्ता में रहते हुए क्या मुख्यमंत्री को यह नहीं लगता कि उनके शब्दों की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है. अजय राय ने यह भी कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री के विरुद्ध लंबित कुछ मुकदमों को वापस लेने के आदेश भी उनकी सरकार में हुए.
जनसमस्याओं पर ध्यान देने की सलाह
अजय राय ने कहा कि प्रदेश के सामने मछली की दावत से कहीं बड़े मुद्दे हैं. इनमें बिगड़ती कानून-व्यवस्था, थानों में पुलिस की लापरवाही, महिलाओं और बच्चियों तथा कमजोर वर्गों पर अत्याचार, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों और नौजवानों की परेशानी, बिजली व्यवस्था, सड़कों का निर्माण और प्रशासनिक भ्रष्टाचार शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों सहित बड़ी संख्या में लोग अन्याय की शिकायत कर रहे हैं. इन सवालों का जवाब विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जमीन पर काम करने से मिलेगा.
अजय राय ने त्योहारों के दौरान चीनी, दालों, तेलों और खाद्य पदार्थों के दाम कम रखने पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि जनता इन बातों को समझ रही है और 2027 में अपने अनुभव के आधार पर फैसला करेगी.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को झूठी और अप्रमाणित बयानबाजी बंद कर प्रदेश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि यदि व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति ही करनी है तो पद की गरिमा के लिए इस्तीफा देना बेहतर होगा.
अजय राय ने कहा कि केवल भगवा वस्त्र पहन लेने से संत का आचरण सिद्ध नहीं होता, बल्कि संत की पहचान सत्य, संयम, करुणा और शांति से होती है. उन्होंने कहा कि यदि वैराग्य ही मुख्यमंत्री का मार्ग है तो राजनीति छोड़कर मठ लौटना और सच्चे अर्थों में पूजा-पाठ व जनसेवा करना उनके तथा प्रदेश दोनों के लिए बेहतर होगा.


