रांची। झारखंड में जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को ब्लड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने एक कॉल पर चार घंटे के भीतर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू करने की पहल की है। इसके लिए स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग और एमएस साइंस कंपनी के बीच एमओयू को अंतिम रूप दिया गया है।

नई व्यवस्था को अगले 90 दिनों यानी तीन महीने के भीतर पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा और रांची में एक कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जहां से ब्लड कलेक्शन से लेकर अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी होगी।

हेल्थ मिनिस्टर इरफान अंसारी बोले- आज का दिन खास

नेपाल हाउस मंत्रालय में बुधवार को हुए एमओयू कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह और एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा मौजूद रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने इस पहल को झारखंड के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों के परिजनों को ब्लड की व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि मरीज की जरूरत की जानकारी मिलने के बाद चार घंटे के भीतर ब्लड उपलब्ध कराया जा सके।

ब्लड कलेक्शन से अस्पताल तक की जिम्मेदारी एजेंसी की

एमओयू के तहत संबंधित एजेंसी ब्लड कलेक्शन, जांच, स्टोरेज, रखरखाव और अस्पताल तक रक्त पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी। ब्लड की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने चाईबासा की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मरीजों को बिना जांच किया हुआ रक्त नहीं दिया जाना चाहिए।

गांवों से लेकर पुलिस-एनसीसी तक चलेगा अभियान

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ एनसीसी, एनएसएस, पुलिस बल और निजी रक्तदान शिविरों के माध्यम से रक्त संग्रह किया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। रक्तदान शिविरों में रक्तदाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी एजेंसी करेगी।

90 दिनों में सिस्टम को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य

एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि कंपनी खुद रक्तदान शिविर आयोजित करेगी, जबकि तकनीकी सहयोग स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिया जाएगा। मानव संसाधन समेत अन्य व्यवस्थाएं कंपनी की जिम्मेदारी होंगी। एजेंसी को प्रति यूनिट ब्लड के आधार पर भुगतान किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सरकारी और निजी अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बढ़ाना और ब्लड की कमी के कारण मरीजों व उनके परिजनों को होने वाली परेशानी को कम करना है।