Election Commission On SIR: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में ही कोहराम मच गया है. SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाने के बाद इलेक्शन कमीशन में फूट पड़ गई है. दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के फैसले से नाराज हैं. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं. इसे लेकर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है.

अखिलेश ने एक्स पर लिखा कि ‘ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं. एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं. कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है. ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले.’

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बता दें इससे पहले मामले को लेकर चुनाव आयोग की भी प्रतिक्रिया सामने आई. आयोग ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)  समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं. एसआईआर पर सभी फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए.

गौरतलब है कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है. इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं. एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं. दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए.