ODISHA DESK, कटक: लगभग 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कटक की एक स्थानीय अदालत से संदिग्ध आतंकवादी मौलवी अब्दुर रहमान को बड़ी राहत मिली है। आतंकवादी संगठन ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से संबंध रखने के आरोपों में गिरफ्तार किए गए रहमान को कटक की जिला एवं सत्र अदालत ने मंगलवार को सबूतों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष (प्रॉसिक्यूशन) रहमान के खिलाफ आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।

कटक के पश्चिमकच्छ के रहने वाले अब्दुर रहमान को दिसंबर 2015 में भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों ने उन पर आरोप लगाया था कि वह युवाओं को भड़काकर आतंकवादी संगठन में भर्ती करने (रेडिकलाइज करने) का काम कर रहे थे। इसके साथ ही उन पर टांगी इलाके में एक मदरसा चलाकर गरीब परिवारों के बच्चों को बेहद दयनीय और संदिग्ध परिस्थितियों में रखने का भी आरोप था।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट और दावों में कहा था कि रहमान ने सऊदी अरब, यूएई और जम्मू-कश्मीर की यात्राएं की थीं। इतना ही नहीं, पुलिस ने यह भी दावा किया था कि रहमान साल 2007 में ब्रिटेन के ग्लासगो एयरपोर्ट पर हुए आत्मघाती हमले के प्रयास में मारे गए आतंकवादी मोहम्मद कफील के संपर्क में भी था।

इन तमाम गंभीर और संवेदनशील आरोपों के बावजूद, अभियोजन पक्ष अदालत के सामने कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। कटक जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बिना सबूतों के आरोपों को सही नहीं माना जा सकता। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही रहमान के सिर से एक दशक पुराना आतंक का साया हट गया है। कटक के इस सबसे हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक के बंद होने के साथ ही अदालत ने यह कड़ा संदेश दिया है कि न्याय व्यवस्था में केवल आरोपों के दम पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, सबूत ही सर्वोपरि हैं।

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