कुशीनगर के नौ वर्षीय अल्फाज शेख को नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपनी गुल्लक की रकम देने की पहल पर नेपाल सरकार ने स्मृति चिह्न और धन्यवाद पत्र भेजकर सम्मानित किया. गांधी जयंती पर जिलाधिकारी संजय चौहान ने कलेक्ट्रेट में अल्फाज को नेपाल सरकार की ओर से भेजा गया सम्मान प्रदान किया.

कुशीनगर. पडरौना तहसील क्षेत्र के बेतिया गांव निवासी नौ वर्षीय अल्फाज शेख को नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए की गई मानवीय पहल के लिए सम्मान मिला है. नेपाल सरकार ने अल्फाज के लिए स्मृति चिह्न और धन्यवाद पत्र भेजा, जिसे गांधी जयंती के अवसर पर जिलाधिकारी संजय चौहान ने कलेक्ट्रेट में उसे प्रदान किया.

गुल्लक की रकम देने की पहल

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही की तस्वीरों ने अल्फाज को काफी प्रभावित किया था. इसके बाद उसने करीब एक साल से अपनी गुल्लक में जमा रकम आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए देने का फैसला किया.

अल्फाज ने अपने पिता बाबू खान के साथ तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को पत्र भेजकर अपनी गुल्लक की रकम अधिकृत राहत कोष में जमा कराने का अनुरोध किया था. उसकी इस पहल की जानकारी सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया.

नेपाल सरकार ने भेजा सम्मान

जिला आपदा विशेषज्ञ रवि प्रकाश राय के मुताबिक, 28 सितंबर को नेपाल सरकार की ओर से दूतावास के माध्यम से अल्फाज के लिए स्मृति चिह्न और धन्यवाद पत्र समेत तीन पुरस्कार जिला प्रशासन को प्राप्त हुए थे. गांधी जयंती पर जिलाधिकारी संजय चौहान ने अल्फाज को कलेक्ट्रेट बुलाकर नेपाल सरकार की ओर से भेजा गया स्मृति चिह्न सौंपा.

सम्मान मिलने पर अल्फाज काफी खुश नजर आया. उसके पिता बाबू खान मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाते हैं और परिवार में चार बच्चे हैं. अल्फाज तीन भाइयों और एक बहन में तीसरे नंबर पर है तथा गांव के पास स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा सात में पढ़ता है.

बाढ़ की तस्वीरों से प्रभावित

नेपाल के नुवाकोट जिले में त्रिशूली और ताड़ी नदी के संगम पर स्थित देवीघाट में बाढ़ के बाद गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी. अचानक बाढ़ का अलर्ट जारी होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा.

बाढ़ के पानी और मलबे से कस्बे के बड़े हिस्से में नुकसान हुआ था. मकानों और दुकानों समेत बड़ी मात्रा में संपत्ति प्रभावित हुई थी. इन्हीं हालात की तस्वीरें देखकर अल्फाज ने अपनी छोटी-सी बचत नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए देने का निर्णय लिया था.