Odisha Desk, कोरापुट: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमावर्ती क्षेत्र ‘कोटिया’ को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। कोटिया में आंध्र प्रदेश प्रशासन द्वारा पंचायत/स्थानीय चुनाव आयोजित कराने की कोशिशों के खिलाफ ओडिशा के सभी राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर कड़ा विरोध जताया है। नेताओं, स्थानीय निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निर्णय लिया है कि वे चुनाव वाले दिन कोटिया में मौजूद रहकर आंध्र प्रदेश के इस एकतरफा कदम का पूर्ण विरोध करेंगे।
कोटिया में आंध्र की चुनावी गतिविधियों को नाकाम करने के लिए ओडिशा प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हो गई है:
सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए ओडिशा पुलिस ने कोटिया सीमा पर विशेष चेकपोस्ट स्थापित किए हैं और सुरक्षा के लिए 8 प्लाटून पुलिस बल तैनात किया है। सीमा पर सख्ती बरतते हुए ओडिशा पुलिस ने आंध्र प्रदेश की ओर से आए राशन (चावल) से लदे वाहनों को वापस मोड़ दिया है। इसके साथ ही कोटिया क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे आंध्र प्रशासन के अधिकारियों को भी सीमा से लौटा दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले चुनावों में आंध्र प्रदेश ने कोटिया के भीतर पोलिंग बूथ बनाए थे, लेकिन ओडिशा के कड़े रुख को देखते हुए इस बार आंध्र ने कोटिया से बाहर अपने क्षेत्र में पोलिंग बूथ बनाए हैं। ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार कोटिया के मुद्दे पर पूरी तरह सतर्क और तैयार है।
मंत्री ने बताया कि कोटिया विवाद 1968 से चला आ रहा है जब ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। 2021 में तत्कालीन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन को लेकर याचिका दायर की थी। अब राज्य की नई सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक और अदालत की अवमानना याचिका दाखिल की है। यह मामला आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराया गया है।
राजस्व मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश का यह रवैया संवैधानिक संकट पैदा कर रहा है। ओडिशा सरकार इस कानूनी लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों की सलाह ले रही है।
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