अजय कुमार शास्त्री, बेगूसराय। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार और न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर उठा विवाद अब बिहार तक पहुंच गया है। इसी मामले के विरोध में मंगलवार को बेगूसराय सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने एक दिवसीय विरोध-प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जाहिर किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने संबंधित न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना था कि यदि अधिवक्ताओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़े इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दरअसल, पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को अदालत कक्ष में एक अधिवक्ता और सरकारी पक्ष से जुड़े लोगों के बीच बैठने की जगह को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इस दौरान न्यायमूर्ति अजय भनोट ने संबंधित अधिवक्ता को कड़ी फटकार लगाई और उन्हें जेल भेजने की बात कही। बार एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि अधिवक्ता द्वारा माफी मांगने के बावजूद उनसे पुलिस अधिकारी से भी माफी मांगने को कहा गया। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव के साथ कथित तौर पर उपहास किए जाने का आरोप भी लगाया गया।
इस घटनाक्रम के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायाधीश के व्यवहार पर गंभीर आपत्ति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की थी। इसके विरोध में अधिवक्ताओं ने संबंधित अदालत की कार्यवाही के बहिष्कार का भी आह्वान किया था। 28 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर में हंगामा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
बेगूसराय सिविल कोर्ट में प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायपालिका में न्यायाधीश और अधिवक्ता दोनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों के बीच आपसी सम्मान और गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि किसी अधिवक्ता के साथ अदालत के अंदर अपमानजनक व्यवहार होता है तो उस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत विरोध नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान, प्रतिष्ठा और विधिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। न्याय की मांग करना और अपने सम्मान की रक्षा के लिए आवाज उठाना प्रत्येक अधिवक्ता का अधिकार है।
फिलहाल बेगूसराय के अधिवक्ताओं के इस विरोध-प्रदर्शन के बाद इलाहाबाद प्रकरण को लेकर बिहार में भी चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि संबंधित मामले में न्यायिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
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