रांची। जेपीएससी की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी को गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में नेटवर्क से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। सीआइडी ने इन जानकारियों का उल्लेख अदालत के समक्ष भी किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा में कथित सेंधमारी के लिए बनाए गए नेटवर्क में मुख्य आरोपित अभय तिवारी के करीबी उमेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उमेश नामकुम के तेतरी टोली का रहने वाला है, जबकि अभय तिवारी ने भी नामकुम के जोरार में मकान बना रखा था। सीआइडी के मुताबिक, उमेश उसके भरोसेमंद बिजनेस पार्टनर के रूप में काम करता था।
‘सागर पैलेस’ से रकम के बंटवारे का आरोप
पूछताछ और जांच के आधार पर सीआइडी का कहना है कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम, एजेंटों के कमीशन और हिस्सेदारी के बंटवारे का वित्तीय तालमेल रांची के एक ठिकाने ‘सागर पैलेस’ से किया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, उमेश और रमेश ने कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका निभाते हुए अभ्यर्थियों से करीब 1.10 करोड़ रुपये की वसूली की थी। सीआइडी का दावा है कि पूछताछ में दोनों ने रकम वसूलने और उसे अभय तिवारी तक पहुंचाने की बात स्वीकार की है।
जांच एजेंसी को अभय तिवारी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के साथ आरोपितों के सीडीआर लिंकेज मिलने की भी बात कही गई है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों को साइबर सेल के मुख्य तकनीकी अधिकारी से प्रमाणित कराने की प्रक्रिया का भी सीआइडी ने अदालत में उल्लेख किया है।
अभय के आइकार्ड पर दर्ज था उमेश का नंबर
सीआइडी के मुताबिक, जेपीएससी की परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग लिमिटेड) के रांची स्थित गैर-मान्यता प्राप्त कार्यालय में छापेमारी के दौरान उमेश कुमार और अभय तिवारी के विजिटिंग कार्ड और आइकार्ड बरामद किए गए थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि अभय तिवारी के टीडीपीएल आइकार्ड पर उमेश कुमार का मोबाइल नंबर दर्ज था। सीडीआर की जांच में उमेश, अभय और टीडीपीएल से जुड़े कर्मचारियों के बीच लगातार संपर्क की जानकारी सामने आने की बात भी सीआइडी ने कही है।
चार अगस्त को तीन आरोपित गिरफ्तार
उमेश कुमार को उसके दो सहयोगियों बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार के साथ सीआइडी ने चार अगस्त को रांची से गिरफ्तार किया था।सीआइडी के अनुसार, पूछताछ में बुद्धेश्वर और रमेश ने कथित तौर पर बताया कि अभ्यर्थियों से संपर्क करने के बाद उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, चेक, हस्ताक्षरित खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षरयुक्त ए-4 शीट लिए जाते थे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपितों के खिलाफ सामने आए दावों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।


