Paintpur Village Migration: अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की उमरैण पंचायत समिति के पैंतपुर गांव में 28 अक्टूबर को पंचायत चुनाव के लिए मतदान होना है, लेकिन गांव की ज्यादातर गलियां सूनी हैं। यहां रहने वाले नट समाज के अधिकांश परिवार रोजी-रोटी की तलाश में पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में चले जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यह पलायन उनके पूर्वजों के समय से जारी है। सिलीसेढ़ झील के पास बसे इस गांव के लोगों को रोजगार के लिए आज भी दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।

स्थानीय निवासी भूरया के मुताबिक, गांव के अधिकतर परिवार रक्षाबंधन के बाद काम की तलाश में बाहर चले जाते हैं और वैशाख में लौटते हैं। इस दौरान कई घरों पर करीब आठ महीने तक ताले लगे रहते हैं। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ग्रामीण दूसरे राज्यों में नाचने-गाने सहित छोटे-मोटे काम करते हैं।

करीब 900 मतदाता, मतदान के लिए दूसरे राज्यों से बुलाने की कोशिश

पैंतपुर में करीब 900 मतदाता हैं। 28 अक्टूबर को यहां जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए मतदान होना है। भूरया ने बताया कि जब ग्रामीणों के प्रवास के दौरान चुनाव पड़ता है, तो गांव के लोग दूसरे राज्यों से मतदाताओं को गाड़ियों के जरिए मतदान के लिए लेकर आते हैं। वोट डालने के बाद उन्हें वापस उनके काम वाली जगहों पर छोड़ने भी जाते हैं।

इस बार भी मतदाताओं को गांव तक लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रकाश गंगावत ने बताया कि पंचायत चुनाव में पार्टी के लिए हर वोट महत्वपूर्ण है और मतदाताओं को लाने के लिए पार्टी स्तर पर कोशिश की जा रही है।

प्रचार के लिए छह दिन से गांव में घूम रहा ई-रिक्शा

गांव में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रहे ई-रिक्शा चालक लक्ष्मण ने बताया कि एक प्रत्याशी ने उन्हें पैंतपुर में प्रचार करने के लिए कहा है। करीब 200 घरों की बस्ती होने के बावजूद उन्हें गांव में लोग दिखाई नहीं दिए। उनके मुताबिक, गांव से निकलते समय केवल बच्चे स्कूल जाते नजर आए।

लक्ष्मण ने बताया कि वह प्रत्याशी के कहने पर पिछले छह दिनों से ई-रिक्शा के जरिए गांव में प्रचार कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश परिवारों के बाहर रहने के कारण प्रचार के दौरान गांव की गलियां सूनी नजर आती हैं।

लोगों के लौटते ही गांव में फिर आ जाती है रौनक

स्थानीय निवासी खेमचंद के अनुसार, ग्रामीणों के बाहर जाने के बाद गांव की सड़कें सूनी पड़ जाती हैं और बस्ती में सन्नाटा छा जाता है। जब परिवार वापस लौटते हैं, तो गांव में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगती है। ग्रामीणों के गांव में रहने के दौरान कई बार रात में नाच-गाने और मेल-जोल का माहौल भी रहता है।

सिलीसेढ़ झील के पास होने के बाद भी रोजगार की तलाश

पैंतपुर गांव सिलीसेढ़ झील के पीछे बसा है। यह झील पिछले साल रामसर साइट में शामिल हुई थी। जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल झील के नजदीक होने के बावजूद गांव के ज्यादातर लोगों को आजीविका के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।

ग्रामीणों की बताई स्थिति के मुताबिक, रोजगार की कमी के कारण हर साल बड़ी संख्या में परिवार गांव छोड़ते हैं। ऐसे में 28 अक्टूबर को होने वाला मतदान केवल चुनावी गतिविधि नहीं, बल्कि उस गांव की तस्वीर भी सामने ला रहा है, जहां मतदाताओं तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दलों को उनके दूसरे राज्यों में रहने की स्थिति को ध्यान में रखकर प्रयास करने पड़ रहे हैं।

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