अम्बाला में खुद को महामंडलेश्वर बताने वाले एक शख्स ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर महिला से लाखों रुपये और गहने ठगे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर 5 दिन की रिमांड पर लिया है।
अनिल शर्मा, अंबाला। पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से लाखों रुपये और गहनों की धोखाधड़ी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को महामंडलेश्वर योगी आनंद गिरी महाराज बताता है और मानवाधिकार सुरक्षा संघ का संस्थापक होने का दावा करता है। कालाअंब की रहने वाली सुनीता रानी ने शिकायत दी थी कि वर्ष 2024 में उसकी मुलाकात आरोपी से हुई थी, जिसने उसे अपने संघ का महिला विंग अध्यक्ष भी बनाया। आरोपी ने महिला के बेटे ऋषभ बंसल को केंद्र सरकार में एएसओ पद पर लगवाने का झांसा देकर उससे 10 लाख रुपये और गहने ठग लिए। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
नौकरी का झांसा देकर की वसूली
शिकायतकर्ता सुनीता रानी के अनुसार, 21 दिसंबर 2025 को एक रक्तदान शिविर के दौरान आनंद गिरी ने अपने सहयोगी मनीष मिश्रा के साथ मिलकर विश्वास जीता। उसने दावा किया कि उसकी पहुंच सेंट्रल सेक्रेटिएट तक है और वह कई लोगों को नौकरी लगवा चुका है। नौकरी के नाम पर पहले 50 हजार और फिर किश्तों में 5 लाख रुपये खाते में लिए गए। बाद में गाजियाबाद स्थित फ्लैट पर बुलाकर उसे एक फर्जी ‘ऑफर लेटर’ थमाया गया। आरोपी ने फिर से बहाना बनाकर बाकी के 5 लाख रुपये मांगे और दबाव डालकर सुनीता के सोने के गहने भी हड़प लिए। हालांकि, न तो नौकरी लगी और न ही पैसे वापस मिले, बल्कि उल्टा उन्हें धमकियां दी जाने लगीं।
रिमांड पर खुला धोखाधड़ी का राज
ठगी का अहसास होने पर सुनीता जब आरोपी के फ्लैट पर पहुंची, तो उसे मिलने से मना कर दिया गया और उसके बेटे को होटल में छोड़ दिया गया। जांच अधिकारी नरेंद्र यादव ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर नारायणगढ़ पुलिस ने आरोपी महामंडलेश्वर को दबोच लिया है। फिलहाल पुलिस टीम उससे पूछताछ कर रही है ताकि उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी मिल सके। आरोपी ने नौकरी के नाम पर कैसे आम लोगों को अपना निशाना बनाया, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा रिमांड के दौरान किया जाएगा। इस मामले ने क्षेत्र में काफी चर्चा बटोरी है और पुलिस अब इस पूरे रैकेट की गहन जांच में जुट गई है।

