Ambala Martyrs Memorial : चंडीगढ़। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अंबाला में तैयार किए गए 1857 के शहीद स्मारक के उद्घाटन की तैयारियों और इसकी खासियतों की जानकारी दी। यह स्मारक 5 नवंबर को देश को समर्पित किया जाएगा। अमित शाह अंबाला पहुंचकर इसका उद्घाटन करेंगे। इसके अगले दिन यानी 6 नवंबर से आम नागरिक भी स्मारक का भ्रमण कर सकेंगे।

मुलाकात के दौरान अनिल विज ने अमित शाह को स्मारक पर आधारित एक विशेष वीडियो दिखाया। इसमें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं, शहीदों के संघर्ष और स्मारक परिसर में विकसित आधुनिक प्रदर्शन व्यवस्थाओं की झलक दिखाई गई। विज ने बताया कि इस परियोजना के जरिए उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी सम्मान देने का प्रयास किया गया है, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में पर्याप्त जगह नहीं पा सका।

800 करोड़ रुपये में तैयार हुआ भव्य स्मारक

अंबाला-दिल्ली जीटी रोड के किनारे करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्मारक 1857 की क्रांति को समर्पित है। हरियाणा सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 800 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। परिसर में कुल 23 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाओं और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इन गैलरियों में अंबाला, मेरठ, झांसी और कश्मीरी गेट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की भूमिका को दर्शाया गया है। रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे सहित कई वीर सेनानियों के संघर्ष को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है।

डिजिटल तकनीक से देख सकेंगे 1857 की क्रांति

इस स्मारक को केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां आधुनिक तकनीक के जरिए दर्शकों को उस दौर की घटनाओं का अनुभव कराने की व्यवस्था की गई है।

परिसर में 360 डिग्री इमर्सिव प्रोजेक्शन, ड्युअल स्क्रीन वाटर शो और ध्वनि एवं प्रकाश आधारित प्रस्तुतियां तैयार की गई हैं। डिजिटल माध्यम से युद्धक्षेत्रों, बाजारों और जेल की कोठरियों जैसे दृश्य दिखाए जाएंगे। इससे यहां आने वाले विद्यार्थी और पर्यटक 1857 के संघर्ष को ज्यादा करीब से समझ सकेंगे।

स्मारक परिसर में 206 फुट ऊंचा टावर भी बनाया गया है। इसके अलावा 210 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को भी परिसर की प्रमुख पहचान के रूप में विकसित करने की योजना है।

10 मई 1857 को अंबाला में विद्रोह के मिले थे संकेत

इस स्मारक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 1857 के विद्रोह में अंबाला की भूमिका से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। यहां प्रदर्शित अभिलेखों के आधार पर अंबाला में मेरठ से पहले विद्रोह की गतिविधियां शुरू होने के संकेत सामने रखे गए हैं।

9 जून 2026 को स्मारक का निरीक्षण करने पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने भी यहां मौजूद ब्रिटिश दस्तावेजों और टेलीग्राम का उल्लेख किया था। इन अभिलेखों में 10 मई 1857 की सुबह अंबाला छावनी में सैनिकों की गतिविधियों का जिक्र मिलता है।

एक दस्तावेज में तत्कालीन अंबाला उपायुक्त की ओर से पंजाब के मुख्य आयुक्त सर जॉन लॉरेंस को भेजे गए टेलीग्राफ संदेश का विवरण भी शामिल है। इसमें 60वीं और 5वीं रेजिमेंट के सैनिकों के हथियारों के साथ परेड मैदान में एकत्र होने की सूचना दी गई थी।

अनिल विज के तीन दशक पुराने प्रयास को मिलेगी मंजिल

अंबाला कैंट से विधायक अनिल विज लंबे समय से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग उठाते रहे हैं। उनका मानना रहा है कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अंबाला के योगदान और यहां के शहीदों को उचित स्थान मिलना चाहिए।

इस परियोजना को आगे बढ़ाने में उनकी लगातार सक्रियता रही है। ऐसे में 5 नवंबर को होने वाला उद्घाटन उनके लंबे प्रयासों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनिल विज अंबाला कैंट से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। पांच दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय विज वर्तमान में नायब सिंह सैनी सरकार में ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

6 नवंबर से आम लोग कर सकेंगे भ्रमण

5 नवंबर को उद्घाटन के बाद 6 नवंबर से स्मारक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसके बाद विद्यार्थी, इतिहास में रुचि रखने वाले लोग, शोधार्थी और पर्यटक यहां पहुंचकर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं को देख सकेंगे।

अंबाला में तैयार यह परिसर हरियाणा के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्र के योगदान को नई पहचान देने की कोशिश है। अब उद्घाटन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आधुनिक तकनीक और ऐतिहासिक दस्तावेजों के जरिए तैयार यह स्मारक लोगों को किस तरह अपने इतिहास से जोड़ता है।

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