अंबाला। हरियाणा के अंबाला छावनी में आजादी की पहली लड़ाई के शहीदों को समर्पित ऐतिहासिक शहीद स्मारक-1857 के लोकार्पण समारोह को भव्य बनाने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी 5 नवंबर को इस ऐतिहासिक स्मारक का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद गांधी ग्राउंड में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा। समारोह की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज और संबंधित अधिकारियों के साथ गांधी ग्राउंड का निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने लिया तैयारियों का जायजा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मंत्री अनिल विज की मौजूदगी में हुई इस समीक्षा बैठक को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, शहीदों के सम्मान और नई पीढ़ी को राष्ट्रीय विरासत से जोड़ने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अंबाला छावनी में निर्मित यह स्मारक 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाता है, जिन्हें व्यापक जनमानस तक पहुंचाने की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जाती रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

22 एकड़ में फैला है स्मारक, 22 गैलरियों में दिखेगी क्रांति की गाथा

ऊर्जा एवं श्रम मंत्री अनिल विज के प्रयासों से तैयार यह स्मारक लगभग 22 एकड़ में फैला है। इसे आधुनिक तकनीक और दृश्य माध्यमों से सजाया गया है। परिसर में कुल 22 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें 1857 की क्रांति, क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके बलिदान से जुड़े घटनाक्रम प्रदर्शित होंगे। इसके अलावा परिसर में 63 मीटर ऊंचे कमल के फूल की संरचना बनाई गई है, जो 1857 के संग्राम में संदेश भेजने के प्रतीक कमल और रोटी के ऐतिहासिक संदर्भ को दर्शाती है। यहां दो हाई-स्पीड लिफ्ट, स्काई कैफे, फूड कोर्ट और हेलीपैड जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

700 शहीदों के नाम होंगे सुनहरे अक्षरों में अंकित

इस स्मारक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लगभग 700 गुमनाम क्रांतिकारियों के नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज किए गए हैं, जिनके साथ उनके पिता और गांव का नाम भी होगा। श्रद्धांजलि के लिए विशेष गैलरी बनाई गई है, जहां आधुनिक तकनीक से ज्योति प्रज्वलित करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, हरियाणा सरकार ने प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर बसों के जरिए इस स्मारक का भ्रमण कराने की योजना बनाई है, ताकि युवा पीढ़ी देश के गौरवशाली इतिहास से रूबरू हो सके।

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