अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और बुधवार को उन्होंने कैंपस में मशाल जुलूस निकाला. छात्र चुनाव अधिकारी की नियुक्ति, चुनाव प्रक्रिया शुरू करने और तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं.

अलीगढ़. मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है. बुधवार को करीब 10 दिन से डक पॉइंट पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों ने कैंपस में मशाल जुलूस निकाला और चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की.

छात्रों के मुताबिक, 21 सितंबर से धरना और भूख हड़ताल चल रही है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव को लेकर अब तक कोई स्पष्ट कार्यक्रम सामने नहीं आया है. आंदोलनकारी छात्र चुनाव अधिकारी की नियुक्ति, चुनाव प्रक्रिया शुरू करने और छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं.

2018 से चुनाव नहीं

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में 2018 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं. हर साल चुनाव कराने की मांग उठती रही है, लेकिन इस बार इसे लेकर लगातार आंदोलन किया जा रहा है.

इस दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई, लेकिन दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी. आंदोलनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि धरना समाप्त कराने के लिए अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं.

छात्र यासिर फहद ने कहा कि उनकी मांग छात्रसंघ चुनाव कराने की है और वे ऐसे किसी आश्वासन या प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिससे उनकी मूल मांग कमजोर हो. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के बीच मतभेद पैदा करके आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की जा रही है.

निर्वाचित मंच की मांग

आंदोलनकारी छात्रों के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से विद्यार्थियों की समस्याओं को सामूहिक रूप से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखने के लिए निर्वाचित मंच मौजूद नहीं है. उनका सवाल है कि जब दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव हो रहे हैं, तो AMU में लंबे समय से चुनाव क्यों नहीं कराए गए. छात्रों ने कहा है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

पूर्व छात्र नेता सक्रिय

इस मामले में AMU के पूर्व छात्र नेताओं की सक्रियता भी बढ़ी है. पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी समेत कई पूर्व छात्र नेताओं ने छात्रसंघ की बहाली का समर्थन किया है.अब्दुल हफीज गांधी के अनुसार, छात्रसंघ छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है. उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ होने से छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद तथा समस्याओं के समाधान का रास्ता आसान होता है.