कैथल, राकेश कथूरिया। कैथल की डीसी अपराजिता ने कहा है कि किसानों के लिए धान की सीधी बिजाई यानी डीएसआर (Direct Seeded Rice) तकनीक काफी लाभकारी साबित हो रही है। इस विधि से जहां पानी की बचत होती है, वहीं खेती की लागत भी कम आती है। सरकार द्वारा डीएसआर तकनीक अपनाने वाले किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस वर्ष जिले में 15 हजार एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य तय किया गया है।

डीसी अपराजिता ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक किसान डीएसआर विधि अपनाएं। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को लाभ दिया जा रहा है। डीएसआर विधि से धान की बुवाई करने वाले किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे अनुदान राशि भेजी जाएगी। इसके अलावा डीएसआर मशीन खरीदने पर भी सरकार 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रही है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा ने बताया कि धान रोपाई का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में किसान पारंपरिक खेती के बजाय डीएसआर तकनीक अपनाएं। इस तकनीक से पानी की बचत होती है और खेत में पौधों को पर्याप्त हवा व रोशनी मिलती है। इससे फसल गिरने का खतरा कम होता है और बीमारियों व कीटों का असर भी घटता है। परिणामस्वरूप पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है।
उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक कृषि यंत्रों पर भी सरकार भारी अनुदान दे रही है। इच्छुक किसानों को मशीन की कुल कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 40 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। इसके लिए विभाग की ओर से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
आवेदन के लिए किसान को “मेरी फसल-मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। साथ ही ट्रैक्टर की वैध आरसी, परिवार पहचान पत्र, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी आवश्यक होगी।
किसान अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी, खंड कृषि अधिकारी, उपमंडल कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अभियंता या उप कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर कॉल कर भी योजनाओं की जानकारी ली जा सकती है।

