पटना/नई दिल्ली। भरत तिवारी की कथित एनकाउंटर में हुई मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। न्याय की मांग को लेकर आज, 12 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर परशुराम दल के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। इस आंदोलन में मृतक भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी सहित परशुराम सेना के कई कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए हैं।

​न्याय के लिए आर-पार की लड़ाई

​धरना स्थल पर मौजूद चंदन तिवारी ने अपने भाई की मौत को ‘गैर-संवैधानिक और कानून के खिलाफ’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस मुठभेड़ के नाम पर उनके भाई की हत्या की गई है। चंदन ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेगी और परिवार को न्याय मिलेगा।

​देशभर से जुट रहे समर्थक

​परशुराम दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाधर ने बताया कि इस आंदोलन का विस्तार देशभर में हो गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं। गंगाधर ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी आवाज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक नहीं पहुंचती और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

​लक्की बिष्ट का समर्थन और बिहार सरकार पर सवाल

​सामाजिक कार्यकर्ता लक्की बिष्ट ने भी इस धरने में पहुंचकर इसे एक मां के न्याय की लड़ाई बताया। उन्होंने आरा जाकर भरत तिवारी की मां आशा देवी से मुलाकात की थी। बिष्ट ने बिहार सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 17 जून को घटना के बाद 23 जून को प्राथमिक दर्ज की गई, लेकिन 12 जुलाई तक एक भी गिरफ्तारी न होना प्रशासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि वह अपना वादा निभाने के लिए इस लड़ाई में अंतिम दम तक साथ खड़े रहेंगे।

​मुख्य मांगें
​आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगे निम्नलिखित हैं:

  • ​मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी।
  • ​दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करना।
  • ​पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
  • ​परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • ​गांव के लोगों पर दर्ज मुकदमों की वापसी।

​न्यायिक आयोग के समक्ष बयान

​इस बीच, शनिवार को भरत तिवारी के माता-पिता, आशा देवी और काशीनाथ तिवारी ने आरा स्थित न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के सामने घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी। परिवार को अब न्यायिक आयोग से न्याय की प्रबल उम्मीद है।