पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, चुनावी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। अपनी पारंपरिक सीट को सुरक्षित रखने और जीत का सिलसिला बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने उम्मीदवार बदलने के बाद उपजी परिस्थितियों को संभालने के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट की रणनीति अपनाई है।

​नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर

​बांकीपुर सीट पूर्व विधायक और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ रही है। उम्मीदवार के रूप में अभिषेक सिन्हा के नाम वापस लेने के बाद पार्टी ने नीरज सिन्हा को मैदान में उतारकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन दिल्ली में रहते हुए भी चुनावी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। वे लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और फोन के माध्यम से स्थानीय कोर टीम, मंडल अध्यक्षों और बूथ प्रभारियों से संपर्क में हैं। चुनाव का हर फीडबैक दिल्ली तक पहुंच रहा है और उसी के आधार पर पार्टी की रणनीतियां पल-पल बदल रही हैं।

​बूथ प्रबंधन पर जोर और माइक्रो-मैनेजमेंट

​भाजपा ने प्रचार अभियान को व्यवस्थित करने के लिए एक सख्त कैलेंडर तैयार किया है। इसमें रोड शो, जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाओं और छोटी बैठकों का समय और स्थान पहले ही निर्धारित कर दिया गया है, ताकि एक भी मिनट व्यर्थ न जाए। पार्टी ने बांकीपुर के सभी 422 बूथों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। हर बूथ की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को दी गई है, जिसमें विधायक, सांसद और अनुभवी संगठन कार्यकर्ता शामिल हैं।

​दोपहर तक मतदान का लक्ष्य

​पार्टी की रणनीति का मुख्य हिस्सा बूथ मैनेजमेंट है। हर प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मतदान के दिन दोपहर तक पार्टी के पारंपरिक वोटरों को अधिकतम संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। बीजेपी का मानना है कि यदि शुरुआती घंटों में ही समर्थकों के वोट डलवा लिए गए तो उम्मीदवार बदलने के कारण पैदा हुई किसी भी प्रकार की नकारात्मक स्थिति को निष्प्रभावी किया जा सकेगा।
​युवा चेहरे वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भागीदारी और दिल्ली से मिल रहे मार्गदर्शन के बीच, बीजेपी ने बांकीपुर मुकाबले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। पार्टी अब अपने संगठन की मजबूती के बल पर इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए पूरी तरह से डैमेज कंट्रोल मोड में काम कर रही है।