Anil Vij Narendra Modi Ekta Yatraचंडीगढ़। आज नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और अनिल विज हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। लेकिन करीब 34 साल पीछे जाएं तो दोनों के राजनीतिक सफर का एक दिलचस्प अध्याय सामने आता है। उस दौर में दोनों एकता यात्रा से जुड़े थे। अब अनिल विज ने वर्ष 1992 की एक पुरानी तस्वीर साझा की है। इसमें उनके साथ नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज भी नजर आ रहे हैं।
यह तस्वीर उस समय की याद दिलाती है, जब कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली एकता यात्रा के जरिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया जा रहा था। आज बड़े राजनीतिक पदों पर नजर आने वाले कई नेता उस समय संगठन की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। अनिल विज और नरेंद्र मोदी का साथ भी इसी दौर से जुड़ा है।
एकता यात्रा में हरियाणा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे विज
एकता यात्रा का मकसद देश की एकता और अखंडता का संदेश देना था। यात्रा के समापन पर श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने का कार्यक्रम तय था। इस अभियान में नरेंद्र मोदी यात्रा के प्रबंधन से जुड़े थे। वहीं, हरियाणा में यात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी अनिल विज को दी गई थी।
विज ने उस समय केसरिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठनात्मक भूमिका निभाई थी। यानी हरियाणा में यात्रा की तैयारियों और उसे सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम उनके जिम्मे था।
34 साल में बदल गईं जिम्मेदारियां
वक्त के साथ दोनों नेताओं की राजनीतिक यात्राएं आगे बढ़ीं। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। अनिल विज हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहे और अंबाला छावनी उनकी राजनीति का प्रमुख केंद्र बना। आज वह प्रदेश सरकार में ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
वर्ष 1992 की तस्वीर इसी लंबे सफर के पुराने पड़ाव की याद दिलाती है। उस समय संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं की भूमिकाएं आज से अलग थीं। लेकिन एकता यात्रा से जुड़ा यह प्रसंग उनके राजनीतिक जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।
अंबाला छावनी से प्रदेश की राजनीति तक विज का सफर
अनिल विज की राजनीति का बड़ा हिस्सा अंबाला छावनी से जुड़ा रहा है। स्थानीय मुद्दों को उठाने और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के कारण भी वह चर्चा में रहते हैं। अंबाला में हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजना और 1857 की क्रांति को समर्पित शहीदी स्मारक उनके क्षेत्र से जुड़े प्रमुख कार्यों में गिने जाते हैं।
उनकी राजनीतिक पहचान लंबे संगठनात्मक अनुभव और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका से बनी है। वर्ष 1992 की तस्वीर इसी सफर के शुरुआती दौर की एक झलक सामने लाती है।
पुरानी तस्वीर ने याद दिलाया संगठन का दौर
राजनीति में समय के साथ पद और जिम्मेदारियां बदलती हैं। कई बार एक पुरानी तस्वीर उन दिनों की याद दिला देती है, जब आज के बड़े नेता संगठन के स्तर पर काम कर रहे थे। अनिल विज की साझा की गई यह तस्वीर भी एकता यात्रा से जुड़े उसी दौर को सामने लाती है।
इसमें नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज के साथ विज की मौजूदगी उस समय की राजनीतिक गतिविधियों की याद दिलाती है। करीब साढ़े तीन दशक पुराना यह प्रसंग दिखाता है कि आज अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे इन नेताओं के राजनीतिक सफर में एकता यात्रा का भी अपना स्थान रहा है।

