Lifestyle Desk : आयुर्वेद में शरीर की देखभाल के लिए तेल मालिश का विशेष महत्व बताया गया है। सिर से लेकर पैरों तक तेल लगाने कीपरंपरा सदियों पुरानी है। इसी परंपरा में नाभि में तेल लगाने काभी खास महत्व माना जाता है। खासकर सर्दियों के मौसम में कईलोग नाभि में तेल लगाना पसंद करते हैं।
माना जाता है कि इससे त्वचा को नमी मिलती है और शरीर को आराम मिलता है। वहीं,आयुर्वेद में कलौंजी के तेल को भी कई गुणों से भरपूर माना गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर सर्दियों में रोजाना नाभि में कलौंजी का तेल लगाया जाए तो इससे शरीर को क्या फायदे होसकते हैं? आइए जानते हैं।
नाभि को क्यों माना जाता हैशरीर का महत्वपूर्ण केंद्र?
आयुर्वेद में नाभि को शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गयाहै। गर्भावस्था के दौरान बच्चा गर्भनाल के जरिए मां से जुड़ा होताहै। इसी गर्भनाल के माध्यम से उसे ऑक्सीजन और पोषणमिलता है। जन्म के बाद गर्भनाल काट दी जाती है और नाभि कानिशान रह जाता है। इसी वजह से पारंपरिक मान्यताओं में नाभि को शरीर का महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि जन्म के बाद नाभि का शरीर के अलग-अलग अंगों तक पोषण पहुंचाने का काम नहीं रहता। नाभि में तेल लगाने से शरीर के आंतरिक अंगों को विशेष लाभ मिलने के वैज्ञानिक प्रमाण भी फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।

त्वचा को मिल सकती है नमी
सर्दियों में ठंडी हवा और कम नमी के कारण त्वचा रूखी और बेजान होने लगती है। ऐसे में कलौंजी का तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद फैटीएसिड त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। नाभि के आसपास की त्वचा पर इसकी कुछ बूंदें लगाने से रूखेपन मेंराहत मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए नाभि में तेल लगाना जरूरी नहीं है। शरीर के अन्य रूखे हिस्सों पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
त्वचा को मिलते हैं एंटीऑक्सीडेंट गुण
कलौंजी के तेल में थाइमोक्विनोन नामक एक महत्वपूर्ण यौगिक पाया जाता है। इसे इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान के खिलाफ काम करने में मदद करते हैं। हालांकि,त्वचा पर कलौंजी का तेल लगाने से मिलने वाले फायदे और नाभिके रास्ते शरीर में इसके असर को लेकर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक शोध नहीं हैं।
नाभि के आसपास कीत्वचा को मिलती है राहत
कई बार नाभि के आसपास की त्वचा रूखी हो जाती है या खिंचाव महसूस होता है। ऐसे में तेल की हल्की मालिश से त्वचा को आराम मिल सकता है। कलौंजी के तेल की कुछ बूंदें लेकरआसपास की त्वचा पर हल्के हाथों से लगाने से नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ध्यान रखें कि नाभि के अंदर बहुतज्यादा तेल न डालें।
मालिश से आराम
तेल से हल्की मालिश करने पर शरीर को आराम महसूस हो सकता है। सर्दियों में गर्माहट और रिलैक्सेशन के लिए लोगअक्सर तेल मालिश का सहारा लेते हैं। नाभि के आसपास हल्के हाथों से मालिश करना भी एक आरामदायक सेल्फ केयर रूटीन हो सकता है। हालांकि, इससे पाचन, हार्मोन या शरीर के दूसरेआंतरिक कार्यों में सुधार होने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
नाभि में कलौंजी का तेल लगाने का सही तरीका
अगर आप नाभि में कलौंजी का तेल लगाना चाहते हैं तो कुछसावधानियां बरतना जरूरी है।
1-सबसे पहले नाभि और उसके आसपास की जगह को साफकरके अच्छी तरह सुखा लें।
2-कलौंजी के तेल की 1-2 बूंदें उंगली पर लें।
3-इसे नाभि के आसपास की त्वचा पर हल्के हाथों से लगाएं।
4-तेल लगाने के लिए जोर से मालिश न करें।
5-अगर खुजली, जलन, लालिमा या किसी तरह की एलर्जीमहसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
इन बातों का रखें खास ध्यान कलौंजी का तेल प्राकृतिक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह हर किसी की त्वचा के लिए सुरक्षित होगा। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें। नाभि में संक्रमण, घाव, खुजली या किसी तरह की सूजन होने पर तेल न लगाएं। बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

