रांची। झारखंड के शहरी क्षेत्रों में सड़कों, गलियों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों के नाम अब तय नियमों के तहत रखे और बदले जाएंगे। नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगरपालिका नामकरण और नंबरिंग नियमावली-2026 लागू कर दी है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नियम राज्य के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में प्रभावी हो गया है।

30 दिन के भीतर बनेगी विशेष टीम

नई व्यवस्था के तहत हर नगरपालिका में 30 दिनों के भीतर एक सर्वे टीम बनाई जाएगी। नगर आयुक्त या मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित यह टीम शहर में मौजूद ऐसे नामों की समीक्षा करेगी, जो जाति, धर्म, समुदाय या लिंग के आधार पर आपत्तिजनक या संवेदनशील माने जा सकते हैं।

टीम को अपनी रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर संबंधित नगरपालिका को सौंपनी होगी। इसके बाद नगरपालिका अपनी अनुशंसा राज्य स्तरीय समिति को भेजेगी।

इन नामों पर पूरी तरह रोक

नई नियमावली में नामकरण को लेकर कई स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। किसी सड़क, मोहल्ले या सार्वजनिक स्थल का नाम—

0 जातिसूचक या सांप्रदायिक नहीं हो सकेगा।
0 किसी व्यक्ति या समुदाय को अपमानित करने वाला नहीं होगा।
0 अश्लील या भड़काऊ नाम नहीं रखा जा सकेगा।
0 समुदायों के बीच विवाद या तनाव बढ़ाने वाले नाम प्रतिबंधित होंगे।
0 पहले से मौजूद नाम से मिलता-जुलता नाम भी नहीं रखा जा सकेगा।

इसके अलावा किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर सार्वजनिक स्थल का नाम रखने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होगी।

दोषी व्यक्ति के नाम पर भी नहीं होगा नामकरण

ऐसे व्यक्ति के नाम पर भी सड़क या सार्वजनिक स्थल का नाम नहीं रखा जा सकेगा, जिसे राज्य के खिलाफ अपराध या नैतिक अधमता के मामले में दोषी ठहराया गया हो।

नाम बदलने का अंतिम अधिकार सरकार के पास

किसी सार्वजनिक स्थान के नामकरण, संशोधन या पुराने नाम को समाप्त करने का अंतिम अधिकार नगर विकास एवं आवास विभाग के पास रहेगा। नगरपालिका और विभाग के बीच मतभेद होने पर विभाग का फैसला अंतिम माना जाएगा।

राज्य स्तरीय समिति करेगी पूरी प्रक्रिया की निगरानी

नामों की समीक्षा के लिए स्टेट लेवल नेमिंग एंड रेशनलाइजेशन कमेटी (SLNRC) बनाई जाएगी। नगर प्रशासन निदेशक इसके अध्यक्ष होंगे। संबंधित जिले के अधिकारी, नगर निकाय के अधिकारी और गृह विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि समिति का हिस्सा होंगे।

नए नाम हिंदी-अंग्रेजी में होंगे दर्ज

स्वीकृत नामों को हिंदी और अंग्रेजी या किसी अन्य अनुसूचित भाषा में बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा। नाम बदलने के बाद संपत्ति के यूनिक प्रिसिसेस नंबर रजिस्टर में संशोधन के लिए स्थानीय लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

सरकारी नामपट्ट हटाने, तोड़ने, खराब करने या बिना अनुमति के दूसरा नाम लगाने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।