कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी अशोक चौधरी ने राजनीतिक गलियारों में चल रही परिवारवाद की चर्चाओं और हालिया चुनाव परिणामों पर अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी भी परिवार को सत्ता का केंद्र नहीं बनाया।

​ममता बनर्जी पर हमला और भाजपा की जीत

​पश्चिम बंगाल के चुनावी रुझानों और परिणामों पर टिप्पणी करते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी के शासन से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी थी। उन्होंने कहा, “यह अब पूरी तरह साफ हो गया है कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी। भाजपा को मिली भारी जीत इस बात का प्रमाण है कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों पर अपना अटूट विश्वास जताया है।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष चाहे जो भी दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि जनता ने अपना फैसला सुना दिया है।

​निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री: परिवारवाद या जनभावना?

​नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में आने को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इसे परिवारवाद के चश्मे से देखना सरासर गलत है। चौधरी ने तर्क दिया कि अगर नीतीश जी को परिवारवाद करना होता, तो वे निशांत को बहुत पहले ही राजनीति में स्थापित कर चुके होते। उन्होंने खुलासा किया कि निशांत कुमार की सक्रियता जनता और जेडीयू कार्यकर्ताओं की निरंतर मांग के बाद हुई है। कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करते हुए ही उन्हें आगे लाया गया है, जो कि लोकतंत्र की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

​विपक्ष पर तंज: ईवीएम और कांग्रेस की स्थिति

​कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि विपक्षी दलों के पास हार का कोई ठोस बहाना नहीं होता, इसलिए वे अक्सर EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का सहारा लेते हैं। अखिलेश यादव के बयानों पर उन्होंने कहा कि हारने के बाद ईवीएम पर दोष मढ़ना इन नेताओं की पुरानी आदत बन चुकी है। वहीं, केरल में कांग्रेस द्वारा नेता का चुनाव न कर पाने की स्थिति पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और वे ही जानें कि उनकी पार्टी में क्या चल रहा है।