Ashok Gehlot Bhajanlal Sharma Row: राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों पर गहलोत ने बुधवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पलटवार किया।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों का जिक्र करते हुए पीपाड़ में खाद-बीज की दुकान खोलने का घटनाक्रम बताया और मुख्यमंत्री से सवाल किया कि उस समय वे महज पांच साल के रहे होंगे, तो उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन को लेकर ऐसी बातें किस आधार पर कही गईं?

पीपाड़ की दुकान से लेकर छात्रसंघ चुनाव तक का जिक्र

गहलोत ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने पीपाड़ में खाद-बीज की दुकान खोली थी, लेकिन करीब छह महीने बाद ही उसे बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जोधपुर यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और पढ़ाई शुरू की। इसी दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाते हुए भजनलाल शर्मा के आरोपों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री उस समय बहुत छोटे थे, तो उनके राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर को लेकर ऐसी बातें कहां से आईं और उनके पीछे क्या तथ्य हैं?

24 घंटे का समय देने के बाद भी नहीं मिला खेद

गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से व्यक्तिगत और मिथ्या आरोप लगाए जाने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि भजनलाल शर्मा को अपनी गलती का अहसास होगा और वे अपने बयान पर खेद जताएंगे। इसी उम्मीद में उन्होंने मुख्यमंत्री को 24 घंटे का समय दिया था। हालांकि, गहलोत के मुताबिक समयसीमा पूरी होने के बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई खेद व्यक्त नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री पद की गरिमा का भी उठाया मुद्दा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नीतियों, फैसलों और कार्यशैली को लेकर बहस होती रहती है। लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा और पद की गरिमा बनाए रखना भी जरूरी है। गहलोत ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पड़ताल होनी चाहिए। खासकर मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से यह अपेक्षा रहती है कि वे व्यक्तिगत टिप्पणी करने से पहले उसकी सत्यता सुनिश्चित करें।

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