Ashok Gehlot on PM Modi Rahul Gandhi: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए और प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए। अपनी बात रखते हुए उन्होंने 1984 में संसद के शुरुआती दिनों का उदाहरण भी दिया।

तब BJP के सिर्फ दो सांसद थे
गहलोत ने अपने संसदीय जीवन का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1984 में जब वे दूसरी बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे, तब सदन में भाजपा के केवल दो सांसद थे। इसके बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष भाजपा नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती और संसदीय परंपराओं की गरिमा रही है। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन में सभी पक्षों के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
राहुल गांधी पर टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की ओर से राहुल गांधी के प्रति इस्तेमाल की जा रही भाषा और कटाक्ष उन्हें दुखी और निराश करते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र में दोनों का सम्मान समान रूप से जरूरी है।
गहलोत के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष की ओर से जनहित के मुद्दे उठाए जाने पर व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय तथ्यों और नीतिगत तर्कों के आधार पर जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से गंभीर और तथ्यात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जाती है।
राहुल गांधी के संघर्ष और आत्मविश्वास का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका की सराहना भी की। उन्होंने राहुल गांधी को नेक, निर्भीक, कर्मठ और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध नेता बताया। गहलोत ने कहा कि भाजपा की ओर से लगातार किए जा रहे राजनीतिक हमलों और दुष्प्रचार के बावजूद राहुल गांधी का आत्मविश्वास, संघर्ष और जनता के प्रति समर्पण मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलते हुए संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा बताया संघर्ष
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी का संघर्ष किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के भविष्य से जुड़ा संघर्ष माना जाना चाहिए। उन्होंने सत्ता के कथित अहंकार और तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष की बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज सुनी जानी चाहिए।
गांधी परिवार के प्रति भरोसे का भी किया जिक्र
गहलोत ने गांधी परिवार के राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले करीब 35 वर्षों से इस परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री पद पर नहीं रहा है। इसके बावजूद देश के अलग-अलग क्षेत्रों, जातियों, भाषाओं और धर्मों के लोगों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भरोसा इस परिवार के प्रति बना हुआ है। गहलोत के मुताबिक, यह विश्वास किसी पद या सत्ता की वजह से नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण, त्याग, संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की विरासत से जुड़ा है।
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