Rajasthan Politics: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को जयपुर स्थित अपने सिविल लाइंस आवास पर मीडिया से बातचीत में शिखर अग्रवाल के APO और 40 विला खरीद प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से जवाब मांगा।

गहलोत ने मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराने की मांग की। इस दौरान उन्होंने SIR, चुनाव आयोग और भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान पर भी राज्य और केंद्र सरकार को घेरा।

40 विला खरीद मामले में मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल के APO होने के बाद गहलोत ने 40 विला खरीद प्रकरण को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे मौजूदा सरकार के करीब तीन साल के कार्यकाल का बड़ा कथित घोटाला बताया। पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि मामला केवल एक अधिकारी को APO करने से खत्म नहीं हो सकता।

गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिए गए फैसलों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से खुद सामने आकर यह स्पष्ट करने की मांग की कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे सरकार क्या कदम उठाने जा रही है।

CMO के अधिकारियों और तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के तत्कालीन चेयरमैन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उनके मुताबिक, फैसलों की प्रकृति से जानबूझकर भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है।

गहलोत ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की। उन्होंने विदेश में मौजूद संबंधित अधिकारी दंपती से तत्काल भारत लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील भी की। ये आरोप और जांच की मांग गहलोत की ओर से उठाए गए हैं। मामले में सरकार और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

IG की उदयपुर पोस्टिंग और UDA पर भी उठाए सवाल

गहलोत ने शिखर अग्रवाल प्रकरण के साथ मुख्यमंत्री के सामने अधिकारियों के बीच हुए कथित विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने विवाद से जुड़े एक IG की उदयपुर में पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का सामना कराने के बजाय अच्छी पोस्टिंग दी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम की जांच की जरूरत बताई। उन्होंने उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और अधिकारी की पोस्टिंग व तबादले को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

गहलोत के मुताबिक, शिखर अग्रवाल का मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक फैसलों की जवाबदेही का सवाल भी जुड़ा है।

रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखने की सलाह दोहराई

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी पुरानी सलाह दोहराते हुए कहा कि उन्हें अपने रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के नाम भी विवादों में सामने आ रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने एक युवक का नाम लेते हुए दावा किया कि वह जयपुर में घूम रहा है, जबकि उनके मुताबिक पुलिस रिकॉर्ड में वह फरार है। गहलोत ने कहा कि उनके कार्यकाल में उस युवक को भरतपुर में पकड़ा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ से पहले एक मामले को बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए और सरकार से संबंधित व्यक्ति की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

SIR को लेकर चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

गहलोत ने दिल्ली में होने वाली लोकतंत्र बचाओ रैली के समर्थन में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग NDA सरकार के दबाव में काम कर रहा है। गहलोत ने दावा किया कि SIR के जरिए 13 करोड़ से अधिक वोट काटे गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दिए गए हलफनामों को लेकर भी सवाल उठाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर दबाव होने का आरोप लगाते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली की रैली किसी राजनीतिक दल की ताकत दिखाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज उठाने का प्रयास है।

भाजपा के पदयात्रा अभियान पर गहलोत का तंज

भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान पर भी गहलोत ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार देखा जा रहा है कि विपक्ष की रैली के जवाब में सत्तारूढ़ दल को भी सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

गहलोत ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहता है तो उसके कार्यक्रमों पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि सत्ता पक्ष भी राजनीतिक अभियान चला रहा है। उनके मुताबिक, विपक्ष का सड़कों पर उतरना समझ में आता है, लेकिन सरकार को भी इसी तरह सड़क पर उतरना पड़े, यह अलग स्थिति है।

सरकार बदलने का रास्ता चुनाव, रैली नहीं: गहलोत

गहलोत ने स्पष्ट किया कि रैलियों के जरिए सरकार बदलने की बात नहीं की जा सकती। लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, रैली नहीं। उन्होंने कहा कि रैलियां और प्रदर्शन जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने का माध्यम हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र समर्थकों से दिल्ली में होने वाली रैली में भागीदारी की अपील की। उनके मुताबिक, यह अभियान लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए है।

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