Asian Games 2026: भारतीय टेकबॉल खिलाड़ी क्विंसी जोआकिम डिसूज़ा ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने महिला सिंगल्स इवेंट में दो जीत हासिल करके शुक्रवार को सीधे सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
क्विंसी ने ग्रुप A के अपने दूसरे मैच में जापान की युइना साकामोतो के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त वापसी की। पहला गेम 10-12 से हारने के बाद उन्होंने अगले दो गेम 12-11 और 13-11 से जीते और कड़े मुक़ाबले में 2-1 से जीत हासिल की।
इसके बाद, इस भारतीय खिलाड़ी ने ग्रुप A के तीसरे मैच में कंबोडिया की कोएमयेन DY को 2-0 से आसानी से हराया। क्विंसी ने पहला गेम 12-9 से जीता और फिर मैच 12-7 से जीतकर महिला सिंगल्स इवेंट के सेमीफ़ाइनल के लिए सीधे क्वालिफ़ाई किया।
क्या है टेकबॉल?
हंगरी में शुरू हुए टेकबॉल में फ़ुटबॉल के कुछ गुण और एक खास तरह की मुड़ी हुई टेबल का इस्तेमाल होता है। इसे मोटे तौर पर फ़्रीस्टाइल फ़ुटबॉल और सेपक टकरा का मिला-जुला रूप कहा जा सकता है, जिसे टेबल टेनिस जैसी मुड़ी हुई सतह पर खेला जाता है। खिलाड़ी गेंद को वापस भेजने के लिए अपने पैरों, घुटनों, जांघों, छाती और सिर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें हाथों और बाहों का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं होती।
इस खास मुड़ी हुई टेबल की वजह से गेंद का रास्ता बदल जाता है और खिलाड़ियों को बहुत ज़्यादा कंट्रोल, टाइमिंग, रिफ़्लेक्स और सटीकता की ज़रूरत होती है।
मैच सिंगल्स या डबल्स में खेला जा सकता है। विरोधी खिलाड़ी को गेंद वापस भेजने से पहले खिलाड़ी ज़्यादा से ज़्यादा तीन बार गेंद को छू सकते हैं, लेकिन शरीर के एक ही हिस्से का लगातार इस्तेमाल करने पर कुछ पाबंदियां होती हैं।
कहाँ से हुई टेकबॉल की शुरुआत?
टेकबॉल की शुरुआत 2014 के आसपास हंगरी में हुई थी। यह आइडिया फ़ुटबॉल के शौकीनों के टेबल पर फ़ुटबॉल खेलने के प्रयोगों से आया, जो बाद में आज इस्तेमाल होने वाली खास मुड़ी हुई टेबल के कॉन्सेप्ट में बदल गया।
इस खेल को विकसित करने और लॉन्च करने का श्रेय गैबोर बोरसानी, विक्टर हुज़ार और ग्योर्गी गैट्यान को जाता है। इंटरनेशनल टेकबॉल फ़ेडरेशन (FITEQ) की स्थापना 2017 में हुई थी।
कैसे खेला जाता है टेकबॉल?
टेकबॉल का बुनियादी ढांचा टेबल टेनिस जैसा ही है, लेकिन इसमें रैकेट और पैडल की जगह फ़ुटबॉल स्किल्स का इस्तेमाल होता है।
खिलाड़ी गेंद को बिना बाउंस होने दिए टेबल के दूसरी तरफ़, यानी विरोधी के पाले में भेजने की कोशिश करते हैं। एक सेट आम तौर पर 12 पॉइंट का होता है और मैच ‘बेस्ट-ऑफ़-थ्री’ फ़ॉर्मेट में खेले जाते हैं। डबल्स में टीम के साथियों को बारी-बारी से गेंद को छूना होता है, जिससे खेल में रणनीति का एक और पहलू जुड़ जाता है।
इस खेल में पाँच मुख्य कैटेगरी हैं: पुरुषों का सिंगल्स, महिलाओं का सिंगल्स, पुरुषों का डबल्स, महिलाओं का डबल्स और मिक्स्ड डबल्स।
कौन से देश मज़बूत हैं टेकबॉल में?
टेकबॉल का सबसे ज़्यादा दबदबा पारंपरिक रूप से यूरोप में रहा है, जहाँ से यह खेल शुरू हुआ था, लेकिन एशिया और दूसरे इलाकों में भी इसका तेज़ी से विकास हुआ है।
थाईलैंड एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है, खासकर इसलिए क्योंकि इस देश का सेपक टकरा से पुराना नाता रहा है। सेपक टकरा भी एक ऐसा खेल है, जिसमें हाथों का इस्तेमाल किए बिना गेंद को कंट्रोल करना होता है। सेपक टकरा के असर से थाई खिलाड़ियों ने शानदार एरियल और बाइसिकल-किक तकनीकें विकसित की हैं।
FITEQ की लिस्ट में अभी दुनिया भर में 147 नेशनल फ़ेडरेशन शामिल हैं। ब्राज़ील, हंगरी, रोमानिया, पोलैंड और सर्बिया जैसे देशों में टेकबॉल की स्थापित कम्युनिटीज़ और कॉम्पिटिटिव खिलाड़ी हैं, और अलग-अलग इलाकों में इसके खास स्टाइल भी सामने आए हैं।
एशियाई खेलों में टेकबॉल
जापान में होने वाले 2026 एशियाई खेल इस खेल के लिए एक अहम पड़ाव हैं, क्योंकि टेकबॉल पहली बार एशियाई खेलों में शामिल हो रहा है। इन खेलों में सोलह देश इस खेल में हिस्सा ले रहे हैं।
भारत की तीन सदस्यीय टेकबॉल टीम में क्विंसी डिसूज़ा, मोहम्मद अनस इमरान बेग और डेक्लान मार्शल गोंसाल्वेस शामिल हैं। डिसूज़ा महिला सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में हिस्सा लेंगी, जबकि अनस और गोंसाल्वेस पुरुष डबल्स इवेंट का हिस्सा हैं।
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