Atar Singh Bhadana Murder Case: भरतपुर में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोमवार को जैसलमेर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि 11 अक्टूबर को हुई इस गंभीर घटना के बाद प्रभावी कार्रवाई में तीन दिन क्यों लगे।

गहलोत ने कहा कि केवल निलंबन और एपीओ जैसी कार्रवाई से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। उन्होंने मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी राजस्थान में सूखे और अकाल जैसी परिस्थितियों का मुद्दा उठाते हुए किसानों और पशुपालकों के लिए समय पर राहत देने की मांग की।

भड़ाना हत्याकांड में कार्रवाई में देरी पर सवाल

अशोक गहलोत रविवार को दो दिवसीय दौरे पर जैसलमेर पहुंचे थे। सोमवार को फलोदी रवाना होने से पहले उन्होंने एक होटल में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड को गंभीर मामला बताते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

गहलोत ने कहा कि वह पीड़ित परिवार से मिल चुके हैं और घटना की गंभीरता को समझते हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर उन्होंने सवाल किया। उनके मुताबिक, मामले में सिर्फ अधिकारियों को निलंबित करने या एपीओ करने के बजाय जवाबदेही तय करना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना जरूरी है।

आईजी और एसपी की जवाबदेही तय करने की मांग

गहलोत ने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर वारदात के बाद संबंधित आईजी और एसपी को बुलाकर जवाब क्यों नहीं मांगा गया। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से जुड़े जिले में हुई है। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने के नैतिक अधिकार को लेकर भी सवाल उठाया।

पश्चिमी राजस्थान में सूखे-अकाल के हालात पर चिंता

कानून व्यवस्था के अलावा गहलोत ने जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सूखे और अकाल जैसी परिस्थितियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में चारे और पानी की उपलब्धता बड़ी चिंता है। ऐसे हालात में किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए सरकार को समय रहते कदम उठाने चाहिए।

गहलोत ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर जरूरी राहत कार्य शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी करना जरूरी है, ताकि ग्रामीण परिवारों और पशुधन को परेशानी से बचाया जा सके।

चारा डिपो और पेयजल व्यवस्था की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने सूखे जैसी स्थिति में पशुधन को बचाने के लिए पशु चारा डिपो खोलने और पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उचित व्यवस्था करने पर भी जोर दिया।

गहलोत के मुताबिक, राहत कार्यों में देरी होने से किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने किसान संवाद के जरिए इन समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने की बात कही। उनका कहना था कि किसानों और पशुपालकों की परेशानियों को सामने लाकर सरकार को आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है।

मदन राठौड़ के बयान पर भी बोले गहलोत

मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राठौड़ को बिना किसी किंतु-परंतु के स्पष्ट रूप से माफी मांगनी चाहिए और खेद जताना चाहिए।

गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान का नाम आते ही लोगों को पुलवामा और जम्मू-कश्मीर की घटनाएं याद आती हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से जुड़े अतीत और घटनाओं को देखते हुए राठौड़ के बयान से लोगों में नाराजगी है। जैसलमेर में गहलोत की इस बातचीत में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही, सूखे के हालात और किसानों-पशुपालकों की समस्याएं प्रमुख मुद्दे रहे।

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