Lifestyle Desk- आजकल सनग्लास हो या नंबर वाला चश्मा, यह सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि लाइफ़स्टाइल का हिस्सा भी बन चुका है. लेकिन चश्मा पहनने वाले ज्यादातर लोगों की एक आम समस्या होती है—लेंस पर धूल, उंगलियों के निशान और चेहरे का नेचुरल ऑयल जम जाना. इससे न सिर्फ देखने में परेशानी होती है बल्कि चश्मे की चमक भी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. ऐसे में लोग जल्दबाजी में शर्ट का कोना, टिश्यू पेपर या कोई भी कपड़ा उठाकर लेंस साफ कर लेते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक यही आदत आपके महंगे चश्मे को नुकसान पहुंचा सकती है.

दरअसल, चश्मे के लेंस पर एक खास प्रोटेक्टिव कोटिंग होती है जो उन्हें स्क्रैच और यूवी किरणों से बचाती है. जब हम रफ कपड़े, टिश्यू या कपड़ों के किनारे से लेंस साफ करते हैं तो उन पर मौजूद धूल के महीन कण लेंस पर रगड़ खाते हैं और धीरे-धीरे स्क्रैच बना देते हैं. शुरुआत में ये निशान छोटे होते हैं लेकिन समय के साथ देखने में धुंधलापन आने लगता है.

क्या है चश्मा साफ करने का सही तरीका?

चश्मा साफ करने का सबसे सुरक्षित तरीका गुनगुने पानी और माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल है. सबसे पहले चश्मे को हल्के पानी से धो लें ताकि धूल के कण हट जाएं. इसके बाद लेंस पर एक बूंद माइल्ड लिक्विड साबुन लगाकर उंगलियों से धीरे-धीरे साफ करें. फिर साफ पानी से धोकर माइक्रोफाइबर कपड़े से हल्के हाथों से पोंछ लें. यह तरीका लेंस की कोटिंग को सुरक्षित रखता है और चश्मे को लंबे समय तक नया बनाए रखता है.

इन चीजों से रखें दूरी

बहुत से लोग चश्मा साफ करने के लिए हैंड सैनिटाइजर, ग्लास क्लीनर या अल्कोहल बेस्ड स्प्रे का इस्तेमाल कर लेते हैं. यह आदत भी नुकसानदायक हो सकती है. इन प्रोडक्ट्स में मौजूद केमिकल्स लेंस की कोटिंग को खराब कर सकते हैं. खासकर एंटी-ग्लेयर और ब्लू-कट लेंस पर इसका असर जल्दी दिखाई देता है. इसके अलावा चश्मे को सिर पर चढ़ाकर रखने या बिना केस के बैग में डालने से भी स्क्रैच पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जब भी चश्मा इस्तेमाल में न हो, उसे हमेशा हार्ड केस में रखें.

क्यों जरूरी है सही देखभाल?

एक अच्छी क्वालिटी का चश्मा आज के समय में हजारों रुपये का आता है. ऐसे में उसकी सही देखभाल करना जरूरी है ताकि बार-बार लेंस बदलवाने की जरूरत न पड़े. सही तरीके से साफ किया गया चश्मा न सिर्फ लंबे समय तक टिकता है बल्कि आंखों को भी आराम देता है. साफ लेंस से देखने पर आंखों पर कम दबाव पड़ता है और सिरदर्द या आंखों की थकान जैसी समस्याएं भी कम होती हैं.