Dharm Desk – सनातन धर्म में भोजन साक्षात ‘अन्नपूर्णा’ और जीवन की ऊर्जा का स्त्रोत माना गया है। हमारी खान-पान से जुड़ी छोटी-छोटी आदतें सीधे तौर पर कुंडली के ग्रहों को प्रभावित करती है। अनजाने में की गई गलतियां जीवन में ग्रह दोष और परेशानियों का कारण बन सकती हैं। आइए जानते हैं भोजन से जुड़ी ऐसी ही कुछ खास धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं, जो आपके जीवन और भाग्य पर गहरा प्रभाव डालती हैं…

  1. थाली में भोजन छोड़ना
    थाली में भोजन को कभी भी झूठा नहीं छोड़ना चाहिए। थाली में अन्न छोड़ना भौतिक सुख-वैभव और ऐश्वर्य के कारक शुक्र ग्रह को कमजोर करता है। इसी तरह खाना खाने के बाद थाली में हाथ भी नहीं धोना चाहिए। इससे घर में सुख-सुविधाओं और समृद्धि में कमी आ सकती है। इसे लेकर एक कहावत भी है, उतना ही लो थाली में, जो फिकाए न नाली में…ज्योतिष सलाह देता है कि हमेशा उतना ही भोजन परोसें जितनी भूख हो।
  2. रात के समय दही का सेवन
    ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार, रात के समम दही खाने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह आदत मन और शीतलता के कारक चंद्रमा के साथ-साथ शुक्र को भी प्रभावित करती है। जिससे स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर असर पड़ सकता है।
  3. खड़े होकर या बिस्तर पर भोजन करना
    इस आदत को न्याय के देवता शनि ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक दृष्टि से हमेशा जमीन पर पालथी मारकर या आराम से बैठकर भोजन करना ही उत्तम माना गया है। बिस्तर पर भोजन करना अशुभ माना जाता है और इसका संबंध राहु ग्रह से जोड़ा गया है। भोजन के लिए घर में एक निश्चित, पवित्र और स्वच्छ स्थान होना चाहिए।
  4. बिना स्नान किए भोजन करना
    बिना स्नान किए भोजन करने की आदत का संबंध मान-सम्मान और ऊर्जा के कारक सूर्य ग्रह से माना गया है। सनातन परंपरा में खाना खाने से पहले स्नान करने, हाथ-पैर धोने और पूरी स्वच्छता बरतने पर विशेष जोर दिया गया है।
  5. मुफ्त का भोजन और जूठे बर्तन छूना
    बिना संकोच मुफ्त का भोजन करना: किसी के भी स्थान पर बार-बार मुफ्त या हक से परे भोजन करते रहना शनि ग्रह के कमजोर होने का संकेत माना जाता है।
  6. जूठे हाथ से बर्तन छूना: यह आदत आध्यात्मिक उन्नति में बाधा डालने वाले केतु ग्रह से जुड़ी मानी गई है।
    दूसरों की थाली में झांकना: यह आदत बुद्धि और संवाद के कारक बुध ग्रह पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।