अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव-2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं. सरयू तट पर भव्य आयोजन की शुरुआत हो चुकी है. बुधवार (4 नवंबर) को 56 घाटों पर करीब 35 हजार स्वयंसेवक पहुंचे. उन्होंने दीयों को सजाने का काम शुरू कर दिया. इस बार राम की पैड़ी समेत सरयू तट के सभी 56 घाटों पर 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है.
दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी की जा रही है. इसमें उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. वहीं, 7 नवंबर को होने वाली सामूहिक सरयू आरती के लिए भी अभ्यास शुरू हो गया है.
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35 हजार स्वयंसेवकों ने संभाली जिम्मेदारी
बुधवार को अवध विश्वविद्यालय परिसर से दो दर्जन बसों में भरकर स्वयंसेवक राम की पैड़ी पहुंचे. यहां पहुंचते ही सभी ने अपने निर्धारित घाटों की जिम्मेदारी संभाल ली. विश्वविद्यालय के अलावा संबद्ध महाविद्यालयों और इंटरमीडिएट कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को भी इस काम में लगाया गया है. सभी 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये सजाए जाएंगे। इसके लिए घाटों पर मार्किंग ब्लॉक बनाए गए हैं. स्वयंसेवक तय स्थानों पर दीये रख रहे हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि निर्धारित समय में सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं.
देशभर के लोक कलाकार दिखाएंगे अपनी कला
इस बार दीपोत्सव में देश की अलग-अलग लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी. संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे. मथुरा का मयूर और बम रसिया, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का करमा और गाजीपुर का धोबिया नृत्य आकर्षण का केंद्र होगा. इसके अलावा झांसी का राई, पीलीभीत का थारू और सुलतानपुर का नटवरी नृत्य भी प्रस्तुत किया जाएगा.
दूसरे राज्यों के कलाकार भी अपनी कला दिखाएंगे. पश्चिम बंगाल का श्रीखोल, ओडिशा का मास्क डांस, झारखंड का पुरुलिया छऊ, गुजरात का तलवार रास और राजस्थान का घूमर प्रस्तुत किया जाएगा. बिहार की झिझिया और मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे.
गोबर से बने 5100 दीये भी जलाए जाएंगे
दीपोत्सव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा. इसके लिए पिरखौली स्थित अस्थायी गोआश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश के गोबर से 5100 दीये तैयार किए गए हैं. रमेश सिंह सेवा संस्थान की ओर से तैयार इन दीयों को मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह को सौंपा गया है. इस पहल का उद्देश्य गोबर के उपयोग को बढ़ावा देना और गोसेवा को आत्मनिर्भरता से जोड़ना है.
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2100 से अधिक लोग करेंगे सामूहिक सरयू आरती
7 नवंबर को सरयू तट पर सामूहिक आरती का आयोजन होगा. इसमें 2100 से अधिक लोग शामिल होंगे. श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के गुरु राजेश शुक्ला ने बताया कि विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के 700 से अधिक बटुक आरती में शामिल होंगे. इसके लिए नियमित अभ्यास कराया जा रहा है.
मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि आरती में अलग-अलग समुदायों की महिलाओं को भी शामिल किया जा रहा है. इनमें दलित और निषाद समुदाय की महिलाएं, समाजसेवी और संस्कृतिकर्मी शामिल होंगी. सभी एक जैसी वेशभूषा में आरती करेंगी. इसका उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों को अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है.

