मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और राम मंदिर की कानूनी लड़ाई में तीन दशकों तक कोर्ट में पक्ष रखने वाले स्वर्गीय त्रिलोकीनाथ पांडेय रामसखा के पुत्र अमित पांडेय ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है. पत्र में अमित पांडेय का कहना है कि उन्होंने “राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम” को चरितार्थ करते हुए तपस्वी जीवन व्यतीत किया. हिन्दू हृदय सम्राट कहे जाने वाले पांडेय ने राम मंदिर निर्माण की लड़ाई में अपना सर्वस्व त्याग दिया और लगातार 34 वर्षों तक प्रभु श्री राम जी के विधिक मित्र बनकर माननीय न्यायालयों में मंदिर के पक्ष में विधिक पक्ष प्रस्तुत कर विजय श्री प्राप्त की.
परिवार का आरोप है कि आज उनके अतुल्य योगदान को उपेक्षित और विलुप्त करने की स्थिति में रखा गया है, जो उचित नहीं है. पांडेय ने राम काज को ही अपने जीवन का मूल उद्देश्य समझा, घर-गृहस्थी और बच्चों की परवरिश पर कभी विशेष ध्यान नहीं दिया. राम जी के कार्य के सामने घर का कार्य उनके लिए नगण्य था, आर्थिक स्थिति दयनीय होने के बावजूद वे प्रमुख पर्व-त्योहारों पर भी घर नहीं पहुंच पाते थे. आज उनका परिवार अत्यंत साधारण परिवेश में जीवन व्यतीत कर रहा है. इसी को लेकर अमित कुमार पांडेय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के समक्ष 3 मांगें प्रस्तुत की हैं.
इसे भी पढ़ें : जन्माष्टमी पर CM योगी की खास ‘पाती’, श्रीकृष्ण के संदेश से जोड़ा शासन; बोले- अन्याय का प्रतिकार और निर्बल का संरक्षण जरूरी
- राम मंदिर परिसर या मुख्य द्वार के सामने त्रिलोकी नाथ पांडेय की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए.
- 2. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में परिवार के एक सदस्य को सम्मानजनक पद (ट्रस्ट सदस्य) के रूप में शामिल किया जाए.
- 3. राम मंदिर दर्शन के लिए त्रिलोकीनाथ पांडेय के चाहने वालों और शुभचिंतकों के लिए विशिष्ट दर्शन पास एवं प्रसाद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
परिवार ने सनातन समाज से अपील की है कि त्रिलोकी नाथ पांडेय के अतुल्य योगदान को समझा जाए और उन्हें उचित सम्मान दिया जाए. उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि उन्हें उचित सम्मान मिले, उनके अतुल्य योगदान को सनातन समाज समझे.


