सुनील उपाध्याय छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम से एक साथ दो महत्वपूर्ण और बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां धाम परिसर में स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए आधुनिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ (आयुष अस्पताल) का लोकार्पण किया गया है, वहीं दूसरी ओर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अगली यानी चौथी ‘सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा’ को लेकर बड़ा ऐलान किया है।
बागेश्वर धाम में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
बागेश्वर धाम में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए नए आयुष अस्पताल का शुभारंभ किया गया है। 47 लाख रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया और प्रख्यात कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। चिकित्सकीय स्टाफ और सुविधाएं: अस्पताल के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की गई है। यहाँ मरीजों के इलाज के लिए 2 डॉक्टर, 4 कंपाउंडर और 1 योग प्रशिक्षक अपनी सेवाएं देंगे। यह स्वास्थ्य केंद्र प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलेगा, जिससे समय पर चिकित्सीय परामर्श और उपचार उपलब्ध हो सकेगा। इस अस्पताल के शुरू होने से न केवल स्थानीय ग्रामीणों को बल्कि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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सनातन एकता रथ यात्रा
अपनी अनूठी पदयात्राओं और सामाजिक संदेश के लिए चर्चित बागेश्वर सरकार ने अपनी आगामी यात्रा की रूपरेखा साझा की है। हाल ही में संपन्न हुई तीसरी रथ यात्रा ने 5 दिनों में 5 जिलों से गुजरते हुए करीब 500 किलोमीटर का सफर तय किया था। इस दौरान करीब 3,000 गांवों से गुजरते हुए नशामुक्त समाज, जातिगत भेदभाव से मुक्ति और लव जिहाद के खिलाफ जागरूकता सहित सात प्रमुख संकल्पों का संदेश दिया गया था।
चौथी यात्रा का मार्ग
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अगली (चौथी) सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा उत्तर प्रदेश के लखनऊ से अयोध्या के बीच निकाली जा सकती है, इसके अलावा छत्तीसगढ़ या बिहार में भी यात्रा निकालने पर विचार किया जा रहा है। पिछली यात्रा के दौरान प्रतिदिन 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने और 17 से 19 घंटे तक लगातार चलने की चुनौती का सामना करना पड़ा था। इसे ध्यान में रखते हुए अगली यात्रा में गति को संतुलित करने और प्रतिदिन लगभग 40-50 किलोमीटर का लक्ष्य रखने की योजना बनाई गई है ताकि व्यवस्थाएं और अधिक सुचारू रह सकें।
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