Azamgarh News: शंभूपुर गांव में मां-बाप समेत परिवार के चार लोगों की हत्या के बाद अकेली रह गईं दो मासूम बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार ने उठाने का फैसला किया है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अलसीसर की रामू की ढाणी निवासी डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों के नाम अपनी एक माह की तनख्वाह की FD कराने की घोषणा की है। उनकी इस पहल के बाद आजमगढ़ पुलिस के जवान भी आगे आए हैं और एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देने का निर्णय लिया है।

इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार में अब बुजुर्ग दादी और दोनों बच्चियां ही बची हैं। प्रशासन की ओर से बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी चल रही है।

आठ घंटे तक कमरे में कैद रहीं दोनों बच्चियां

शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी समेत दो पंडितों और एक बच्चे की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने अपने बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। पुलिस करीब आठ घंटे तक आरोपी से बातचीत कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश करती रही। इसी दौरान अरविंद ने अपने 10 वर्षीय बेटे को गोली मार दी और दोनों बेटियों को भी जान से मारने की धमकी दी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला। आरोपी ने पुलिस पर भी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शी बच्ची की हो रही काउंसलिंग

घटना की भयावहता देखने वाली बच्ची के मन पर इसका असर न पड़े, इसके लिए बाल मनोचिकित्सक से उसकी काउंसलिंग कराई जा रही है। दोनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आर्थिक मदद दिलाने की प्रक्रिया भी जारी है। इसी बीच SSP डॉ. अनिल कुमार ने तत्काल मदद से आगे बढ़कर उनके भविष्य के लिए आर्थिक जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

SSP की पहल से पुलिसकर्मी भी आए आगे

डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों के नाम अपनी एक माह की तनख्वाह की FD कराने की घोषणा की है। इसके बाद आजमगढ़ पुलिस के जवानों ने भी बच्चियों की मदद का फैसला किया। पुलिसकर्मियों ने अपना एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देने का निर्णय लिया है। इस पहल को बच्चियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहारे के तौर पर देखा जा रहा है।

MBBS के बाद UPSC, पांचवीं कोशिश में बने IPS

डॉ. अनिल कुमार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के अलसीसर क्षेत्र की रामू की ढाणी के रहने वाले हैं। उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में चिकित्सक के तौर पर सेवाएं दीं। वर्ष 2009 में UPSC परीक्षा पास करने के बाद उनका चयन IRTS में हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा में जाने के लिए प्रयास जारी रखा। पांचवीं कोशिश में UPSC पास कर वे 2016 बैच के IPS अधिकारी बने। वर्ष 2025 में उन्होंने आजमगढ़ SSP का पदभार संभाला। अब दो मासूम बच्चियों के लिए आगे आकर उन्होंने उनके भविष्य को आर्थिक सहारा देने की पहल की है।

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