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बागेश्वर धाम सरकार को मिला गुरु का आशीर्वाद: जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले- धीरेंद्र शास्त्री अंधविश्वासी नहीं, रामकथा ही है राष्ट्र कथा

शब्बीर अहमद,भोपाल। मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Pandit Dhirendra Shastri of Bageshwar Dham) को जान से मारने की धमकी मिली है. जिस पर बमीठा थाना में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है. इसी बीच गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) का पंडित धीरेंद्र शास्त्री को आशीर्वाद मिला है. उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री अंधविश्वासी नहीं है. मंत्री गोपाल भार्गव भी पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Pandit Dhirendra Shastri) के समर्थन में उतर आए हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी मुस्लिम या दूसरे धर्म के व्यक्ति ने धीरेंद्र शास्त्री पर कोई सवाल नहीं उठाया, लेकिन हिंदू धर्म के लोग ही सवाल उठा रहे हैं.

रामकथा ही है राष्ट्र कथा- रामभद्राचार्य

धीरेंद्र शास्त्री के गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) ने कहा कि धीरेंद्र अच्छे व्यक्ति है. उन्होंने मुझसे ही दीक्षा ली. धीरेन्द्र के चमत्कार, ट्रिक हैं या सिद्धि मैं नहीं जानता, लेकिन वो जो भी हो अंधविश्वास नहीं है. भगवान की कृपा से सब संभव है. यह कोई अंधविश्वास नहीं है. यह बिल्कुल फैक्ट है. राम कथा ही राष्ट्र कथा है. मैं राम कथा को राष्ट्र कथा से अलग नहीं मानता. जो श्री राम को राष्ट्र से अलग मानते हैं, वो मेरी कथा में न आएं. दिग्विजय सिंह की बुद्धि खराब हो गई है. राजीव गांधी अच्छे व्यक्ति थे, लेकिन राहुल गांधी तो पप्पू ही है.

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मंत्री गोपाल भार्गव भी समर्थन में उतरे

मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि अभी तक किसी भी मुस्लिम या दूसरे धर्म के व्यक्ति ने धीरेंद्र शास्त्री पर कोई सवाल नहीं उठाया है. दुख की बात तो ये है कि हिंदू धर्म के लोग ही उन पर बार-बार सवाल उठा रहे हैं. सनातन धर्म पर जिनका विश्वास नहीं है, वो भी सवाल उठा रहे हैं. हनुमान जी ने उनको बुद्धि दी है या शक्ति. उसी के आधार पर वो बताते हैं. कुछ लोग जानबूझकर इनके पीछे पड़े हुए हैं. वो मानसिक विकार को दूर कर उसे स्वच्छ करने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए.

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विवाद क्या है ?

नागपुर में भी 13 जनवरी तक उनकी कथा का आयोजन होना था, लेकिन वे वहां से 11 जनवरी को ही लौट आए. इसके बाद से ही उन्हें लेकर विवाद बढ़ता ही गया. नागपुर की अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के संस्थापक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को सबके सामने अपनी शक्ति साबित करने की चुनौती दी थी. इस मामले पर पूरे देश में हंगामा मच गया है. अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने कहा कि जब बागेश्चर धाम सरकार को चमत्कार साबित करने के लिए चुनौती दी गई है तो कथा बीच में ही छोड़कर वह चले गए. 30 लाख रूपए का चैलेंज दिया गया. 

बागेश्वर महाराज ने चुनौती स्वीकार भी किया. उन्होंने कहा कि जिसे चमत्कार देखना वो बागेश्वर दरबार में आए. उन्होंने कहा कि श्याम यहां रायपुर आए, टिकट का खर्च मैं दूंगा. लेकिन वो यहां नहीं पहुंचे. कहा जाता है कि भूत, प्रेत से लेकर बीमारी तक का इलाज बाबा की कथा में होता है. बाबा के समर्थक दावा करते हैं कि बागेश्वर धाम सरकार इंसान को देखते ही उसकी हर तरह की परेशानी जान लेते हैं और उसका समाधान करते हैं. बागेश्वर धाम सरकार का कहना है कि वह लोगों की अर्जियां भगवान (बालाजी हनुमान) तक पहुंचाने का जरिया मात्र हैं. जिन्हें भगवान सुनकर समाधान देते हैं.

कौन हैं बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ?

अभी बागेश्वर धाम की बागडोर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास है. पं. धीरेंद्र का जन्म 1996 में छतरपुर जिले के गढ़गंज गांव में हुआ था. उनका पूरा परिवार आज भी गाड़ागंज में रहता है. पं. धीरेंद्र शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और माता का नाम सरोज गर्ग है. धीरेंद्र के छोटे भाई शालिग्राम गर्गजी महाराज हैं. वह भी बालाजी बागेश्वर धाम को समर्पित है.

पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादा पं. भगवान दास गर्ग भी इस मंदिर के पुजारी थे. कहा जाता है कि पं. धीरेंद्र का बचपन काफी मुश्किलों में बीता. जब वे छोटे थे तो परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि एक समय का भोजन ही मिल पाता था. धीरेंद्र शास्त्री ने कम उम्र से ही बालाजी बागेश्वर धाम में पूजा करना शुरू कर दिया था. पं. धीरेंद्र शास्त्री के दादाजी ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा ली थी. इसके बाद वह गाड़ागंज पहुंचे थे.

बागेश्वर धाम का इतिहास क्या है ?

छतरपुर के पास एक जगह गढ़ा है. यहीं पर बागेश्वर धाम है. यहां बालाजी हनुमान जी का मंदिर है. प्रत्येक मंगलवार को बालाजी हनुमान जी के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है. धीरे-धीरे लोग इस दरबार को बागेश्वर धाम सरकार के नाम से पुकारने लगे. यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जाता है. 1986 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया. 1987 के आसपास एक संत बाबा जी सेतु लाल जी महाराज यहां आए. उन्हें भगवान दास जी महाराज के नाम से भी जाना जाता था. धाम के वर्तमान प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री, भगवान दास जी महाराज के पोते हैं.

इसके बाद 1989 के समय बाबा जी द्वारा बागेश्वर धाम में एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया गया. 2012 में बागेश्वर धाम की सिद्ध पीठ पर श्रद्धालुओं की समस्याओं के निवारण के लिए दरबार का शुभारंभ हुआ. इसके बाद धीरे-धीरे बागेश्वर धाम के भक्त इस दरबार से जुड़ने लगे. दावा होता है कि यहां आने वाले लोगों की समस्याओं का निवारण किया जाता है.

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