कुमार इंदर, जबलपुर। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर विधानसभा क्षेत्र में मीजल्स (खसरा) और मलेरिया सहित अन्य बीमारियों के कारण विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बैहर से कांग्रेस विधायक संजय उइके ने इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार से स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर ‘श्वेतपत्र’ (White Paper) जारी करने की मांग की है।
विधायक का दावा: 5 महीने में 43 बच्चों की मौत
क्षेत्रीय विधायक संजय उइके ने अपने पत्र में दावा किया है कि पिछले 5 महीनों के भीतर दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण बैगा आदिवासी समुदाय के 43 बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। विधायक ने इसे स्वास्थ्य तंत्र और सरकार की सरासर विफलता करार दिया है।
15 मृत बच्चों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग
पत्र के माध्यम से विधायक ने बताया कि-28 परिवारों को सहायता मिली। अब तक प्रशासन की ओर से केवल 28 मृत बच्चों के परिवारों को ही आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। 15 परिवार अब भी वंचित: शेष मृत 15 बच्चों के पीड़ित परिवारों को अभी तक कोई सहायता राशि नहीं मिली है। विधायक ने मांग की है कि इन परिवारों को भी तत्काल राहत राशि जारी की जाए।
दूरस्थ क्षेत्रों में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं
विधायक संजय उइके ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि जिले के दूरदराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से बदहाल हैं। समय पर डॉक्टरों, दवाओं और एम्बुलेंस की उपलब्धता न होने से मासूम बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। उन्होंने मांग की है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।
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