Business Desk – Bank of Japan Rate Hike : जापान के केंद्रीय बैंक Bank of Japan यानी BOJ ने ब्याज दर 1% से बढ़ाकर 1.25% कर दी है। यह बढ़ोतरी 0.25 प्रतिशत अंक की है और इसके साथ जापान की ब्याज दर करीब 31 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। BOJ ने यह फैसला महंगाई के दबाव, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और कमजोर येन से पैदा हो रहे आयात महंगे होने के जोखिम के बीच लिया है। फैसला 7-2 वोट से हुआ।

यह जापान की लंबे समय तक चली बेहद आसान Monetary Policy से आगे बढ़ने का एक और बड़ा कदम है। 2024 की शुरुआत में BOJ की पॉलिसी रेट -0.1% थी। मार्च 2024 में बैंक ने Negative Interest Rate Policy खत्म करते हुए दर को 0 से 0.1% के दायरे में किया था। इसके बाद ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी हुई और अब यह 1.25% हो गई है।
ब्याज दर बढ़ाने की 3 बड़ी वजहें
महंगाई पर काबू: ब्याज दर बढ़ने से कर्ज लेना महंगा होता है। इससे मांग और खर्च पर कुछ दबाव आता है, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। जापान की अगस्त की कोर महंगाई दर 1.7% रही, जो जुलाई के 1.8% से थोड़ी कम है। हालांकि, BOJ के 2% लक्ष्य के आसपास महंगाई बनी हुई है।
येन की कमजोरी रोकना: जापानी येन लंबे समय से दबाव में है। कमजोर येन से विदेशों से खरीदा जाने वाला तेल, गैस और दूसरी वस्तुएं महंगी पड़ती हैं। ब्याज दर बढ़ाने से जापानी संपत्तियों पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ सकता है और इससे येन की मांग को सहारा मिल सकता है। हालांकि, केवल ब्याज दर बढ़ाने से मुद्रा की दिशा तय होना जरूरी नहीं है।
महंगा तेल और Middle East तनाव: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा है। जापान ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में तेल और गैस महंगे होने से घरेलू कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। BOJ ने भी बढ़ती तेल कीमतों और कमजोर येन से जुड़े महंगाई जोखिमों को ध्यान में रखा है।
कभी जापान में ब्याज दर माइनस 0.1% थी
जापान लंबे समय तक दुनिया की सबसे ढीली Monetary Policy वाले देशों में रहा। 2024 की शुरुआत तक BOJ वित्तीय संस्थानों के कुछ चालू खातों पर -0.1% की Negative Interest Rate लागू करता था। इसका उद्देश्य बेहद कम ब्याज के जरिए आर्थिक गतिविधि और महंगाई को बढ़ावा देना था। मार्च 2024 में BOJ ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया और दर को करीब 0 से 0.1% के स्तर पर कर दिया।
इस बदलाव की पृष्ठभूमि जापान की लंबे समय की Deflation समस्या थी। कई वर्षों तक जापान में कीमतों और मजदूरी में कमजोर वृद्धि रही। अब जब महंगाई लगातार बैंक के 2% लक्ष्य के आसपास बनी हुई है, BOJ धीरे-धीरे अपनी पुरानी बेहद आसान नीति से बाहर निकल रहा है।
येन 40 साल के निचले स्तर तक पहुंचा था
जुलाई 2026 में येन डॉलर के मुकाबले करीब चार दशक के निचले स्तर तक कमजोर हुआ था। इसके बाद जापान ने येन को सहारा देने के लिए मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया। जुलाई के अंत में जापान ने डॉलर बेचकर येन खरीदने की कार्रवाई की थी। बाद में अमेरिका के साथ समन्वय भी हुआ।
कमजोर येन जापान के लिए इसलिए बड़ी समस्या है क्योंकि इससे आयातित सामान और खासकर ऊर्जा महंगी होती है। इसका सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है। इसी वजह से BOJ के लिए ब्याज दर और येन दोनों एक-दूसरे से जुड़े अहम मुद्दे बन गए हैं।
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी ने भी दरें बढ़ाने की वकालत की
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने BOJ गवर्नर काजुओ उएदा से मुलाकात के दौरान कमजोर येन से निपटने के लिए निर्णायक Monetary Policy कदम उठाने की वकालत की थी। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक बेसेंट ने महंगाई की उम्मीदों को नियंत्रित करने और येन में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए मजबूत नीतिगत कदमों की जरूरत बताई थी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ब्याज दर बढ़ाने का अंतिम फैसला Bank of Japan ने अपने Monetary Policy Board के जरिए लिया है। 18 सितंबर के फैसले में दो सदस्य बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं थे।
अमेरिका और यूरोप में भी महंगाई बड़ी चुनौती
जापान अकेला ऐसा बड़ा केंद्रीय बैंक नहीं है जो महंगाई के दबाव के बीच ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भी सितंबर में तीन साल में पहली बार अपनी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाई। वहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी महंगाई और ऊर्जा कीमतों से जुड़े जोखिमों के बीच अपनी Monetary Policy को सख्त कर चुका है।
जापान के लिए आगे क्या?
BOJ ने संकेत दिया है कि आगे की ब्याज दर नीति महंगाई, आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यानी 1.25% पर पहुंचने के बाद भी दरों में आगे बदलाव की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फिलहाल बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह महंगाई को नियंत्रित करे, लेकिन ब्याज दरें इतनी तेजी से न बढ़ें कि आर्थिक गतिविधियों और कर्ज लेने वालों पर ज्यादा दबाव पड़े।



