बांका। पुलिस ने कुसुमघट जंगल से एक मानव कंकाल बरामद किया है। मृतक की पहचान दिग्घीबारी गांव के रहने वाले 35 वर्षीय दीनदयाल यादव के रूप में हुई है, जो पिछले करीब डेढ़ महीने से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता थे। कंकाल के पास से मिले दस्तावेजों और मोबाइल फोन से उसकी शिनाख्त हो सकी है। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों ने जमीन विवाद के चलते हत्या की आशंका जताई है।

​डेढ़ महीने पहले अचानक गायब हुए थे दीनदयाल

​मिली जानकारी के अनुसार, दिग्घीबारी गांव निवासी योगेंद्र यादव के पुत्र दीनदयाल यादव बीते 16 सितंबर से अपने घर से लापता हो गए थे। परिजनों से आखिरी बार बातचीत होने के ठीक अगले दिन उनका मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद हो गया था। काफी दिनों तक जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पिता योगेंद्र यादव ने घटना के दो दिन बाद आनंदपुर थाने में गुमशुदगी की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद से ही परिजन लगातार उनकी तलाश में भटक रहे थे।

​मोबाइल लोकेशन के आधार पर जंगल पहुंची पुलिस

​मृतक के भाई संजय यादव ने बताया कि 19 सितंबर को कुछ लोगों ने दीनदयाल को सिमुलतला रेलवे स्टेशन पर देखा था, जो कि उनकी आखिरी लोकेशन से जुड़ा संकेत था। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया और संपर्क टूट गया। पुलिस को तकनीकी अनुसंधान के दौरान मिली मोबाइल लोकेशन के आधार पर आनंदपुर पुलिस ने कुसुमघट जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान पुलिस को वहां मानव कंकाल बरामद हुआ। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष विनोद कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और फोरेंसिक टीम को बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलित करवाए।

​जमीन विवाद को लेकर हत्या का गंभीर आरोप

​मृतक के भाई संजय यादव ने आरोप लगाया है कि इस0 घटना के पीछे पुराना जमीनी विवाद है। उन्होंने दिग्घीबारी गांव के ही रहने वाले प्रमोद यादव, राजेंद्र यादव, श्यामसुंदर यादव, रमेश यादव समेत कुल सात अन्य लोगों पर हत्या का गंभीर शक जताया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी तक हत्या के वास्तविक कारणों और किसी की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के नतीजे आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा। पुलिस फिलहाल सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।