Bastar News Update : जगदलपुर. जिला अस्पताल सोमवार सुबह करीब चार घंटे तक बिजली संकट से जूझता रहा. इमरजेंसी सहित कई वार्ड अंधेरे और गर्मी से प्रभावित रहे. स्टाफ को मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों का काम करना पड़ा. बैकअप व्यवस्था समय पर चालू नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई. जनरेटर के लिए तत्काल डीजल की व्यवस्था करनी पड़ी. एम्बुलेंस से डीजल पहुंचाने की स्थिति भी सामने आई. मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए. गंभीर मरीजों के इलाज पर भी इसका असर पड़ने की बात कही गई. घंटों बाद बिजली बहाल होने पर स्थिति सामान्य हुई. घटना ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों ने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने की मांग की है. स्वास्थ्य सुविधाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी बहस तेज हो गई है.

जर्जर सरकारी भवनों से बढ़ा खतरा

जगदलपुर. बकावंड ब्लॉक में सरकारी भवनों की जर्जर हालत चिंता का विषय बन गई है. छोटे देवड़ा प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान छत का प्लास्टर गिर गया. शिक्षकों और बच्चों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई. कुछ दिन पहले मालगांव पंचायत भवन में भी ऐसा ही हादसा हुआ था. सिलाई प्रशिक्षण के दौरान प्लास्टर गिरने से दो युवतियां घायल हुई थीं. लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भवनों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं. सरपंच ने स्कूल के लिए नए भवन की मंजूरी की मांग की है. महिलाओं के प्रशिक्षण केंद्र को सुरक्षित स्थान पर संचालित करने की भी मांग उठी है. बरसात के मौसम में पुराने भवन और अधिक जोखिम पैदा कर रहे हैं. ग्रामीणों ने तत्काल मरम्मत और नए निर्माण की आवश्यकता जताई है. सुरक्षित शिक्षा और सार्वजनिक भवन अब बड़ी प्राथमिकता बन गए हैं.

डिलमिली का ऐतिहासिक मृतक स्तंभ बदहाल

दंतेवाड़ा. गीदम-दंतेवाड़ा मार्ग के डिलमिली गांव में संरक्षित ऐतिहासिक मृतक स्तंभ उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है. 18-19वीं शताब्दी का यह लकड़ी का स्तंभ अब सड़ने लगा है. कभी इस पर बनी पशु, मानव और पुष्प आकृतियों की सुंदर नक्काशी आकर्षण का केंद्र थीं. संरक्षण के लिए पहले केमिकल ट्रीटमेंट भी कराया गया था. इसके बावजूद समय पर रखरखाव नहीं होने से विरासत को नुकसान पहुंच रहा है. स्तंभ को सुरक्षित रखने बनाई गई छत भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है. छप्पर कई जगह से टूट चुके हैं और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है. आदिवासी समाज में मृतक स्तंभ सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है. आज भी कई स्थानों पर लकड़ी और पत्थर से ऐसे स्तंभ बनाए जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल संरक्षण नहीं हुआ तो ऐतिहासिक धरोहर नष्ट हो सकती है. स्थानीय लोग मरम्मत और नियमित देखरेख की मांग उठा रहे हैं. यह विरासत संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है.

रेल लाइन परियोजना पर निगरानी की तैयारी

जगदलपुर. बस्तर में लंबे समय से अधूरे निर्माण कार्यों की छवि के बीच अब रावघाट–जगदलपुर रेल परियोजना की रफ्तार पर खास नजर रखी जाएगी. रेल लाइन बिछाने से पहले करीब 140 किलोमीटर क्षेत्र में पुल-पुलियों का निर्माण होना है. जनचर्चा है कि यदि निर्माण एजेंसियों ने लापरवाही बरती तो पूरी परियोजना फिर विलंब की भेंट चढ़ सकती है. इसी आशंका को देखते हुए बस्तर सांसद महेश कश्यप ने निगरानी टीम गठित की है. टीम निर्माण कार्य शुरू होते ही ठेकेदारों की प्रगति पर लगातार नजर रखेगी. अनावश्यक देरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की बात भी कही गई है. दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाइन बिछ चुकी है, लेकिन जगदलपुर तक विस्तार अभी बाकी है. इंद्रावती नदी पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल की धीमी प्रगति भी चिंता का कारण बनी हुई है. चार वर्षों में आधा काम पूरा होने से लोगों की आशंकाएं बढ़ी हैं. सांसद का कहना है कि बस्तर का रेल सपना समय पर पूरा कराना प्राथमिकता है. अब निगरानी व्यवस्था से परियोजना की गति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. स्थानीय लोग भी समयबद्ध निर्माण और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

18 जुलाई को लगेगी विशेष लोक अदालत

जगदलपुर. जिला न्यायालय परिसर में 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. इसमें चेक बाउंस यानी धारा 138 एनआई एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी. उद्देश्य लंबित मामलों का आपसी सहमति से शीघ्र समाधान करना है. दोनों पक्षों को समझौते के माध्यम से विवाद खत्म करने का अवसर मिलेगा. लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा. ऐसे मामलों में अपील का प्रावधान नहीं रहता. बैंक प्रतिनिधि, अधिवक्ता और संबंधित पक्ष भी मौजूद रहेंगे. वाद पूर्व यानी प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निपटारा किया जाएगा. इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी. पक्षकार समय और खर्च दोनों की बचत कर सकेंगे. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पात्र लोगों से लाभ लेने की अपील की है. सौहार्दपूर्ण समाधान को इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है.

नई रेल परियोजनाओं का इंतजार, घोषणा के बाद भी जमीन पर काम नहीं

जगदलपुर. गढ़चिरोली–बचेली–बीजापुर रेल परियोजना अब भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है. रेल मंत्रालय ने वर्ष 2024 में अंतिम सर्वे को मंजूरी दी थी. डीपीआर और सर्वे के लिए राशि भी स्वीकृत की गई थी. करीब 22 महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है. यह रेल मार्ग कई राज्यों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. इसके शुरू होने से रोजगार और परिवहन को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. फिर भी जमीनी स्तर पर कोई गतिविधि दिखाई नहीं दे रही.
प्रदेश में कई नई रेल परियोजनाओं पर काम जारी है. लेकिन बस्तर की प्रमुख परियोजनाएं अब भी प्रतीक्षा में हैं. स्थानीय लोगों में परियोजना की प्रगति को लेकर निराशा बढ़ रही है. लंबे समय से रेल विस्तार की मांग दोहराई जा रही है. अब लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है.

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ओवरस्पीड वाहनों पर सख्ती, जून में 308 चालान दर्ज

जगदलपुर. सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है. जून महीने में ओवरस्पीडिंग के 308 मामलों पर कार्रवाई की गई. आधुनिक कैमरों और इंटरसेप्टर वाहनों से लगातार निगरानी रखी जा रही है. विशेष फोकस यात्री बसों और भारी वाहनों पर किया गया है. गति सीमा पार करने वालों पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई हो रही है. ब्लैक फिल्म लगे वाहनों पर भी संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है. मौके पर ही ब्लैक फिल्म हटाकर जुर्माना लगाया जा रहा है. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन कराने पर जोर दिया जा रहा है. यातायात विभाग ने वाहन चालकों से नियमों का पालन करने की अपील की है. सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग को दुर्घटना रोकने का सबसे प्रभावी उपाय बताया गया. अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा. प्रशासन का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाना है.

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