Bastar News Update : जगदलपुर. नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के बाद अब बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था के अगले चरण पर पुलिस का फोकस है. इसी सिलसिले में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम जगदलपुर पहुंचे. उन्होंने बस्तर संभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में नक्सल मुक्त हुए इलाकों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. मैदानी अधिकारियों से अभियान और जमीनी हालात को लेकर फीडबैक लिया गया. अब चुनौती नक्सल गतिविधियों की वापसी रोकने के साथ सामान्य व्यवस्था को मजबूत करना है. बैठक में आगामी सुरक्षा रणनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई. नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की मौजूदगी और निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया. साथ ही सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पुलिस की आगामी कार्ययोजना पर मंथन किया गया. डीजीपी का यह दौरा नक्सल उन्मूलन के बाद बदले सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

फर्जी प्रमाण पत्र से CISF में नौकरी, राजस्थान से गिरफ्तारी

जगदलपुर. फर्जी दस्तावेजों के जरिए CISF में नौकरी हासिल करने के मामले में बस्तर पुलिस ने कार्रवाई की है. सिटी कोतवाली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी सत्यम दीक्षित को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार आरोपी ने दंतेवाड़ा जिले का कथित फर्जी निवास और आय प्रमाण पत्र तैयार कराया था. इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग CISF की भर्ती प्रक्रिया में किए जाने का आरोप है. दस्तावेजों के आधार पर भर्ती होने के बाद आरोपी राजस्थान में नौकरी कर रहा था. जांच के दौरान पुलिस ने राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया. सत्यापन में प्रमाण पत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए. इसके बाद पुलिस ने आरोपी की लोकेशन तलाश कर राजस्थान में दबिश दी. गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाण पत्र हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. मामले में संलिप्तता सामने आने पर अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात पुलिस ने कही है.

स्टील प्लांट आया, सहायक उद्योगों का इंतजार

जगदलपुर. नगरनार स्टील प्लांट के शुरू होने के बाद बस्तर में औद्योगिक विस्तार की उम्मीद बढ़ी थी. उम्मीद थी कि बड़े संयंत्र के साथ छोटे और सहायक उद्योगों का नेटवर्क भी तैयार होगा. लेकिन प्लांट शुरू हुए करीब तीन साल बाद भी स्थानीय स्तर पर सहायक उद्योगों की तस्वीर कमजोर है. एक समय बस्तर में सीमेंट कारखाने, ऑयल मिल और प्लाइवुड जैसे उद्योग संचालित होते थे. इन उद्योगों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन समय के साथ अधिकांश बंद हो गए. अब नगरनार के साथ नए औद्योगिक निवेश को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं. बैलाडीला का लौह अयस्क बाहर जाता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उसका प्रसंस्करण सीमित है. वहीं सीमावर्ती ओडिशा क्षेत्र में सहायक औद्योगिक गतिविधियों के लिए निर्माण कार्य आगे बढ़ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर उद्योगों के सामने जमीन, पर्यावरण और जनविरोध जैसी चुनौतियां भी बताई जाती हैं. व्यापार जगत का कहना है कि बड़ी परियोजनाओं के साथ लघु और कुटीर उद्योगों को भी प्रोत्साहन जरूरी है. बस्तर में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए औद्योगिक नीति पर फिर से मंथन की जरूरत सामने आ रही है.

चार साल के बच्चे की मौत पर 28.66 लाख का मुआवजा

जगदलपुर. सड़क हादसे में चार साल के बच्चे की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मुआवजा तय किया है. प्रथम अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 28 लाख 66 हजार 40 रुपये की राशि निर्धारित की है. मामला नवंबर 2025 में डिमरापाल के नाटखोलका पारा में हुए सड़क हादसे से जुड़ा है. बताया गया कि कृष्णा बघेल बच्चों के साथ खड़ा था, तभी बाइक ने पीछे से उसे टक्कर मार दी. हादसे के बाद बकावंड के सिविल अस्पताल में बच्चे की मौत हो गई थी. मामले में मृतक के माता-पिता, भाई और बहन की ओर से मुआवजे का दावा पेश किया गया. अधिकरण ने मृत बच्चे की संभावित आय को निर्धारित करने के लिए न्यायिक मिसालों का आधार लिया. पीठासीन अधिकारी सिद्धार्थ अग्रवाल ने मृतक की मासिक संभावित आय 12 हजार 500 रुपये मानी. बीमा कंपनी को मुआवजा राशि के साथ नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया गया है. आदेश के अनुसार राशि का भुगतान चारों आवेदकों के बैंक खातों में एक माह के भीतर किया जाना है. हादसे के करीब दस महीने में मामले में फैसला आने से पीड़ित परिवार को न्यायिक राहत मिली है.

पोलावरम के बैकवॉटर पर वैज्ञानिक सर्वे की मांग

सुकमा. पोलावरम परियोजना के संभावित बैकवॉटर प्रभाव को लेकर सुकमा के कोंटा क्षेत्र में चिंता सामने आई है. इसी मुद्दे को लेकर जिला भाजपा ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कोंटा के नदी तटवर्ती गांवों और नगर क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की गई. संभावित जलस्तर और बैकवॉटर की सीमा का तकनीकी आकलन कराने पर जोर दिया गया. इसके साथ ही डूब और जलभराव से प्रभावित हो सकने वाले गांवों की पहचान की मांग रखी गई. कृषि भूमि, मकान और सरकारी संपत्तियों पर संभावित असर का भी सर्वे कराने की बात कही गई. जल संसाधन विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थाओं के माध्यम से हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराने का आग्रह किया गया. ज्ञापन में आंध्रप्रदेश सरकार, केंद्र और केंद्रीय जल आयोग से समन्वय की जरूरत भी बताई गई. यदि किसी क्षेत्र या परिवार के प्रभावित होने की पुष्टि होती है तो पुनर्वास और मुआवजे के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग की गई. जिला भाजपा अध्यक्ष धनीराम बारसे ने समय रहते तकनीकी अध्ययन और सुरक्षात्मक उपाय किए जाने की आवश्यकता बताई. अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी.

बाघों की निगरानी अब वैज्ञानिक तरीके से

बीजापुर. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी और अवैध फंदों की रोकथाम को लेकर प्रशिक्षण आयोजित किया गया. एंटी-स्नेयर और टाइगर मॉनिटरिंग विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में वन अमले को प्रशिक्षण दिया गया. रेंज अधिकारी से लेकर बीट और पेट्रोलिंग गार्ड तक के कर्मचारियों ने इसमें हिस्सा लिया. प्रशिक्षण में टाइगर इकोलॉजी के साथ पगमार्क, स्कैट और स्क्रैच की पहचान सिखाई गई. इसके अलावा किल साइट, ट्रेल वॉक और कैमरा ट्रैप के जरिए निगरानी की प्रक्रिया बताई गई. मैदानी स्तर पर डेटा जुटाने और उसके दस्तावेजीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया. एंटी-स्नेयर वॉक के दौरान संभावित फंदों वाले क्षेत्रों की पहचान और सर्च तकनीक समझाई गई. वनकर्मियों को अभियान के दौरान सुरक्षा उपायों और व्यवस्थित निगरानी की जानकारी दी गई. प्रशिक्षण का उद्देश्य वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की समय रहते पहचान करना भी है. अधिकारियों के मुताबिक वैज्ञानिक तरीके से जुटाया गया फील्ड डेटा भविष्य की संरक्षण योजनाओं में उपयोगी होगा. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में नियमित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया.

गांव से निकाला गया परिवार, शबरी के टापू पर बसाया घर

सुकमा. सुकमा के चिंतलनार इलाके में शबरी नदी के बीच एक टापू एक परिवार के संघर्ष की कहानी बन गया है. पोलमपाड़ निवासी सोनारू राम यादव वर्ष 2018 में गांव छोड़ने के बाद यहां आकर रहने लगे. सोनारू के मुताबिक ग्रामीणों के विरोध और बाद में नक्सलियों की नसीहत के बाद उन्हें गांव छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने टीन और लकड़ी से नाव बनाई और पत्नी के साथ नदी के बीच टापू तक पहुंचे. शुरुआत में झोपड़ी बनाकर रहने वाले सोनारू ने बंजर जमीन को खेती योग्य बनाया. करीब आठ साल की मेहनत के बाद अब वह करीब पांच एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं. उन्होंने टापू पर दंतेश्वरी माता का मंदिर भी बनाया है, जहां फूल और फल चढ़ाकर पूजा की जाती है. लेकिन नदी के बीच रहने के कारण सरकारी सुविधाओं तक पहुंच आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. परिवार के मुताबिक पोते का आधार नहीं बनने से उसका स्कूल में दाखिला भी अटका हुआ है. पेयजल के लिए परिवार रेत में चुआ खोदकर पानी निकालता है, जबकि सोलर पंप की मांग की जा रही है. सोनारू अब बेहतर नाव, आवास और बुनियादी सुविधाओं के सहारे टापू पर परिवार का जीवन सुरक्षित बनाना चाहते हैं. 

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H